सरिता विशेष

औनलाइन खरीदारी एक नया विकल्प बन कर सामने आया है. इस विकल्प ने विक्रेताओं को तो मालामाल बना ही दिया है, के्रताओं के समक्ष भी अच्छे विकल्प खड़े कर दिए हैं. अपना सामान बेचने के लिए अब तक सिर्फ विज्ञापनों का ही सहारा लिया जाता था लेकिन अब उस सामान को आप ग्राहकों के सामने औनलाइन पेश कर सकते हैं. और ग्राहक सिर्फ एक फोन कौल के जरिए भी उक्त सामान को खरीद सकता है.

पत्रपत्रिकाओं या दूसरे संचार माध्यमों के जरिए सामान को ज्यादा से ज्यादा खरीदारों तक पहुंचाने की विज्ञापन की परंपरा इस से खतरे में पड़ती नजर आ रही है. यह ठीक है कि विज्ञापन के बिना किसी भी उत्पाद की बिक्री काफी कठिन होती है और बाजार बनाने के लिए विज्ञापन आवश्यक है लेकिन इधर कई उत्पाद सीधे टीवी पर बेचे जा रहे हैं और टीवी हर घर की, चौपाल की आवश्यक वस्तु है. टीवी पर सामान दिखता है और और्डर मिलते ही आप के द्वार पर मनपसंद वस्तु पहुंच जाती है.

औनलाइन खरीदारी का आलम यह है कि इस में 85 फीसदी की बढ़ोतरी हुई है. यह खुलासा वाणिज्य और उद्योग मंडल यानी एसोचैम ने एक अध्ययन में किया है. रिपोर्ट में कहा गया है कि औनलाइन खरीदारी के दायरे में सभी वस्तुएं आ रही हैं. घरेलू सामान के अलावा आभूषण, प्रसाधन, बच्चों के खिलौने, रसोई का सामान, टीवी, घड़ी, मोबाइल, परफ्यूम और यहां तक कि किताबें भी औनलाइन खरीदी जा रही हैं. रिपोर्ट में कहा गया है कि पिछले 4-5 सालों में औनलाइन खरीदारी के बाजार में बड़ा उछाल आया है और पिछले साल यह बाजार 16 अरब डौलर के आसपास था जिस के अगले 8-10 सालों में 60 अरब डौलर के करीब पहुंचने की संभावना है.

यह नया बाजार है और इस में लोगों की दिलचस्पी तेजी से बढ़ रही है. इस बाजार की बढ़ती लोकप्रियता का अंदाजा इसी बात से लगाया जा सकता है कि बाजार में औनलाइन सामान बेचने की टीवी चैनलों में जैसे होड़ मची हुई है. प्राइम टाइम को छोड़ कर कई चैनलों ने अपने घंटे औनलाइन बिक्री के लिए समर्पित कर दिए हैं. कुछ चैनल तो सिर्फ यही काम कर रहे हैं और चौबीसों घंटे वे सामान ही बेचते नजर आ रहे हैं. खरीदार भी इन चैनलों पर बराबर नजर रखते हैं और उन्हें जो भी पसंद आता है उस का तुरंत और्डर देते हैं. यह नया जमाना है और बदलते समाज में इस तरह के बदलाव स्वाभाविक हैं और इस के प्रति लोगों का आकर्षण बढ़ना भी स्वाभाविक है. इस तरह के आंदोलन से कई परंपराएं टूट जाती हैं और नई परंपराएं शुरू होती हैं. देखना यह है कि यह बाजार कब तक लोगों को आकर्षित करता है.