सरिता विशेष

अगर आपको आपके घर के पास कहीं सेल दिख जाए, तो आपको कितनी खुशी होती है. चाहे वो किसी सलॉन में हो या किसी ग्रोसरी स्टोर में. न चाहते हुए भी और बिना किसी जरूरत के भी आप कुछ जरूरत की और ढेर सारी गैर जरूरती सामान भी उठा लाते हैं. आदतन मजबूरी है या आपकी बेवकूफी इसका फैसला आप खुद ही करें. गौर करने वाली बात यह की इन ‘लुट सके तो लुट’ वाले ऑफर के झांसे में आप बड़ी ही आसानी से फंस जाते हैं. ये भी ध्यान नहीं देते की यहां आपके लुटने की बात लिखी होती है न की ‘लूटने’ की. ये कोई मजाक नहीं पर कई दुकानों की हकीकत है. अगली बार जरा सावधानी से काम लीजिएगा.

आज हम आपको इन दुकानों से सावधानी बरतने का ज्ञान नहीं देंगे, बल्कि कुछ ऐसी बैंकिंग सुविधाओं के बारे में बताएंगे जहां आपका होगा पहले से भी ज्यादा फायदा. बैंक भी सलॉन से ज्यादा दूर तो है नहीं, तो अगली बार जब बैंक का दरवाजा खटखटाएं तो इन सुविधाओं को ध्यान में जरूर रखें.

1. अकाउंट ट्रांसफर करवाने में नहीं लगता कोई शुल्क

कई बार तबादले या फिर नौकरी बदलने के कारण लोगों को शहर भी बदलना पड़ता है. भाग-दौड़ के साथ साथ बैंक के चक्कर भी कई बार काटने पड़ते हैं. पर आरबीआई के नियमों के अनुसार अकाउंट ट्रांसफर करवाना आसाना है. अगर आपको अपना अकाउंट एक ब्रांच से दूसरे ब्रांच में ट्रांसफर करना है, तो इसके लिए आपको कोई अतिरिक्त शुल्क नहीं देना होगा. केवाईसी प्रक्रिया पूरी करने पर ही आपको यह सुविधा मिलेगी. अगर कोई बैंककर्मी आपको नया अकाउंट खुलवाने की हिदायत दे तो आप बैंक अकाउंट ट्रांसफर करने की डिमांड कर सकते हैं.

2. हिन्दी या स्थानीय भाषा में भी भर सकते हैं चेक

कई बार कम पढ़े-लिखे लोग बैंकों में अंग्रेजी भाषा को लेकर परेशान हो जाते हैं. ऐसे लोग बैंक में मौजूद अन्य लोगों से मदद मांगते मिल जाते हैं. पर आरबीआई के नियमों के अनुसार चैक को हिन्दी या स्थानीय भाषा में भी भरा जा सकता है. बहुत से लोगों को इस नियम के बारे में पता ही नहीं होता. आप बैंक से स्थानीय भाषा में छपी चैकबुक की भी मांग कर सकते हैं.

3. बैंक के पास होने चाहिए तीन भाषाओं वाले फॉर्म

बैंक फॉर्म भरने में बहुत से लोगों को दिक्कत होती है. बहुत से क्षेत्रों में अंग्रेजी और हिन्दी दोनों भाषायें ही नहीं बोली जाती. कई बार भाषा की समस्या के कारण भी लोग बैंक आने से कतराते हैं क्योंकि ज्यादातर बैंकों में द्विभाषीय फॉर्म ही मिलते हैं. पर आरबीआई ने स्थानीय निवासियों की सहूलियत के लिए यह साफ तौर पर कहा है कि बैंक के सभी फॉर्म तीन भाषाओं में होने चाहिए.

4. आपकी पर्सनल इनफॉरमेशन का इस्तेमाल करना है गैरकानूनी

बहुत से लोगों को बैंक की अतिरिक्त सेवाओं से जुड़े फोन कॉल आते हैं. कई बार तो फोन करने वाले व्यक्ति के पास आपके अकाउंट से जुड़ी बहुत सारी जानकारियां होती हैं. पर यह गैरकानूनी है. अपनी सर्विसेस के प्रचार के लिए बैंक आपकी निजी जानकारियों का इस्तमाल नहीं कर सकते. अगर अगली बार आपके पास ऐसा कोई फोन कॉल आए तो आपके पास कोर्ट का रास्ता है.

5. एटीएम से जुड़ी समस्या को 7 दिनों के अंदर सुलझाना

आरबीआई की नियमावली के अनुसार आपके एटीएम से जुड़ी किसी भी समस्या का समाधान 7 दिनों के अंदर होना चाहिए. अगर बैंक ने शिकायत दर्ज करने के दिन से 7 दिनों के अंदर आपकी समस्या का समाधान नहीं किया तो बैंक आपको 100 रुपए प्रति दिन के हिसाब से मुआवजा देगा.

6. चैकबुक न मिलना भी है बैंक की जिम्मेदारी

अगर आपको किसी कारणवश चैकबुक नहीं मिला है तो इसकी जिम्मेदारी भी बैंक की होगी न की ग्राहक की. अगर बैंक आपसे चैकबुक खोने पर नए चैकबुक के लिए अतिरिक्त शुल्क मांगे तो आप उन्हें आरबीआई के नियम याद दिला सकते हैं.

बैंकिंग की सुविधा आपके लिए बहुत आवश्यक है. पर उससे भी ज्यादा आवश्यक है कि आप बैंक के नियमों को बारीकि से समझें. फॉर्म वगैरह को अच्छे से पढ़े, जिससे आपके ठगे जाने के आसार कम हो जाएंगे.