सरिता विशेष

जालसाजी हमारी धड़कनों में इस तरह से रचबस गई है कि बेईमान आज सामाजिक प्रतिष्ठा का हकदार बन गया है. बेईमानी कर के पैसा कमाने वाला स्मार्ट है, समझदार है, प्रगतिशील है, परिवार का नाम रोशन करने वाला है और प्रतिष्ठा का हकदार है. शादीविवाह की बात हो तो जरूर पूछा जाता है कि लड़के की ऊपर की कितनी कमाई होती है. भ्रष्टाचार को मिटा कर राजनीति की नौका पर सवार हो कर देश का भाग्यविधाता बनने का सपना देख रहे आम आदमी पार्टी का नेता अरविंद केजरीवाल जब कहता है कि मुझे पैसे ही कमाने होते तो आयकर कमिश्नर रह कर ही कमा लेता. इस का सीधा मतलब है कि आयकर विभाग का आयुक्त भ्रष्टाचारी होता है. भ्रष्टाचार का खेल जिस भूमि पर चल रहा हो और उसे नियंत्रित करने के बजाय इस तरह से उसे महिमामंडित किया जा रहा है तो यह उम्मीद करना ठीक नहीं है कि ‘अच्छे दिन आने वाले हैं.’

बहरहाल, जिन लोगों ने बैंकों से पैसा लिया है और उस पैसे को हजम करना चाहते हैं, हालांकि उन की पैसा लौटाने की क्षमता है, ऐसे बेईमानों पर नकेल कसने के लिए आयकर विभाग और सरकारी क्षेत्र के बैंकों के बीच सहमति बनी है. सहमति के तहत आयकर विभाग कर्जदार की संपत्ति की पूरी सूचना बैंकों को उपलब्ध कराएगा. सूचना के आधार पर बैंक अपना पैसा वसूल करने का प्रयास करेगा. बैंक कानूनी तौर पर कर्जदार की संपत्ति जब्त नहीं कर सकता लेकिन उस के पास कर्जदार का जो विवरण होगा और उस की जो जानबूझ कर पैसा नहीं लौटाने की मंशा है, उस आधार पर बैंक ऋणवसूली न्यायाधिकरण यानी डीआरटी में शिकायत दर्ज कर सकता है और ट्रिब्यूनल बैंक को जानबूझ कर कर्ज लौटाने से बच रहे कर्जदार की संपत्ति को बेचने का आदेश दे सकता है.

सार्वजनिक बैंकों का इस तरह के लोगों पर करीब पौने 2 लाख करोड़ रुपए का कर्ज है जिस की वापसी की बैंकों को कम उम्मीद है लेकिन यदि यह सूत्र काम कर गया तो सरकारी बैंकों में एक तरह से डूबे हुए ऋण की वसूली से नया उत्साह आएगा.’