यकीनन सोलर सिंचाई पंप किसानों और खेतों के लिए काफी मददगार साबित होने लगा है. सोलर प्लांट लगाने के लिए सरकारी लेबल पर कई तरह के अनुदान और मदद दी जा रही है. गांवों में बिजली की कमी और जबतब बारिश न होने से किसानों और खेती को हर साल करोड़ों रुपए का नुकसान उठाना पड़ता है. सिंचाई के बगैर फसलें सूख जाती हैं और किसान सिर पीटते रह जाते हैं. महाराष्ट्र, गुजरात, राजस्थान आदि राज्यों में बड़े पैमाने पर सोलर बिजली से खेतों की सिंचाई होने लगी है, पर देश के ज्यादातर राज्यों में अभी भी किसान इस से मुंह फेरे बैठे हैं.

पटना के सोलर प्लांट सामानों के डीलर एसके दास कहते हैं कि आमतौर पर लोग मानते हैं कि सोलर बिजली प्लांट महंगा होता है या इस के लगाने से खास फायदा नहीं होता है, क्योंकि अगर आसमान पर बादल छा गए तो सोलर प्लांट काम नहीं करेगा. बारिश के मौसम में तो यह पूरी तरह से फेल हो जाता है.

मौसम विभाग की मानें तो साल के 365 दिनों में से 225 से 250 दिन अच्छी धूप वाले होते हैं, इस से सोलर बिजली प्लांट के सही तरीके से काम नहीं करने के आसार काफी कम होते हैं. धूप वाले दिनों में सोलर प्लांटों से काफी बिजली पैदा हो सकती है. सोलर प्लांटों की मदद से सोलर पंप आसानी से चलाए जा सकते हैं. धीरेधीरे ही सही पर अब किसानों को सोलर बिजली और सिंचाई पंप की अहमियत समझ में आने लगी है.

आमतौर पर 1 किलोवाट का सोलर पंप लगाने पर सवा 2 लाख रुपए लागत आती है. सरकार की ओर से इस की कुल लागत की 30 फीसदी छूट मिलती है. इस हिसाब से कुल खर्च 1 लाख 60 हजार रुपए ही बैठता है. ‘मिनिस्ट्री आफ न्यू एंड रिन्यूबल एनर्जी’ 1 से 10 किलोवाट तक का सोलर प्लांट लगाने के लिए 30 फीसदी तक की सब्सिडी देता है. इतना ही नहीं कुल लागत की 50 फीसदी रकम बैंक से बतौर कर्ज ली जा सकती है, जिस पर महज 5 फीसदी ही सूद लगता है. सोलर पैनल की गारंटी 25 साल की होती है और उस की बैटरी की गारंटी 4 से 5 साल की होती है.

बाजार में 2 हौर्स पावर और 4.6 हौर्स पावर के सोलर पंप मौजूद हैं. 2 हौर्स पावर के पंप की कीमत 2 से 3 लाख रुपए है. सरकारी अनुदान के बाद इस की कीमत सवा लाख रुपए के करीब होती है. 4.6 हौर्स पावर वाले पंप की कीमत 8 लाख रुपए के आसपास है, जबकि अनुदान के बाद इस की कीमत साढ़े 3 लाख रुपए पड़ती है. 2 हार्स पावर का पंप 10 मीटर की गहराई से पानी खींच सकता है. इस से रोजाना डेढ़ लाख लीटर पानी खेतों में पहुंचाया जा सकता है. 4.6 हौर्स पावर का पंप 30 मीटर गहराई से पानी खींच सकता है और यह हर रोज सवा 2 लाख लीटर पानी से खेतों की सिंचाई कर सकता है.

कृषि वैज्ञानिक वेदनारायण सिंह कहते हैं कि गांवों में बिजली की भारी कमी की वजह से किसानों को खेती में काफी दिक्कतों का सामना करना पड़ता है और सिंचाई के लिए भाड़े पर डीजल पंपिंग मशीन लेने से किसानों की खेती की लागत बहुत ज्यादा बढ़ जाती है. किसानों को सोलर पंप मुहैया कराने से उन की खेती की लागत में कमी आएगी.

बिहार के कृषि मंत्री राम विचार राय कहते हैं कि हर साल बारिश की कमी की वजह से किसानों का पैसा बरबाद होता है और सरकार को भी राहत और मुआवजे के नाम पर हर साल अरबों रुपए बांटने पड़ते हैं. ‘सौर क्रांति सिंचाई योजना’ के तहत 3 सालों में 1 लाख किसानों को सोलर पंप मुहैया कराए जाने की योजना बनाई गई है. सोलर प्लांट से जहां पर्यावरण का बचाव होता है, वहीं किसानों की बिजली पर निर्भरता कम होती है. हर साल सूखे की चपेट में आए जिलों को राहत पैकेज दिए जाते हैं. सूबे के जुमई, मुंगेर, शेखपुरा, लखीसराय, बेगूसराय, समस्तीपुर, नवादा, गोपालगंज, मधुबनी और भागलपुर जिलों में हर साल कम बारिश की वजह से सूखे के हालात पैदा होते हैं. सोलर बिजली और पंप से खेती और किसानों की दशा और दिशा में भारी बदलाव आ सकता है.