सरिता विशेष

तमाम कीड़े किसानों की मेहनत और पूंजी को मिनटों में चट कर जाते हैं.  कीड़ों से बचाव के लिए हर किसान को इन की रोकथाम के तरीके सीखने जरूरी हैं. कृषि वैज्ञानिकों से सलाह ले कर पेड़ों के पत्तों, तनों और जड़ों को कीड़ों से बचाने के उपाय करने चाहिए. कृषि वैज्ञानिक वेदनारायण सिंह बताते हैं कि कीड़ों से बचाव के थोड़े उपाय कर के किसान अपने फलों के पेड़ों और फलों को बड़ी बरबादी से बचा सकते हैं और अपनी मेहनत का बेहतर मुनाफा पा सकते हैं. आम के पेड़ों को मथुआ कीटों से बचाने के लिए फल तोड़ने के बाद उन की पुरानी शाखाओं को सितंबर से दिसंबर के बीच काट देना चाहिए. 60 ग्राम कार्बेरिल या 30 मिलीलीटर डाइमेथोएट या 45 मिलीलीटर इंडोसल्फान या 15 मिलीलीटर डाइक्लोरोफास को 30 लीटर पानी में मिला कर हर पेड़ पर फूल लगने से पहले छिड़काव करने से इन कीटों से नजात पाई जा सकती है. पहले छिड़काव के 15 दिनों बाद दूसरा और मटर के दाने के बराबर फल आने पर तीसरा छिड़काव करना चाहिए.

मईजून में बगीचे को जोत देने से मिट्टी के भीतर छिपे कीड़े व उन के अंडे धूप की गरमी और पक्षियों के खाने से खत्म हो जाते हैं. जोती गई जमीन में 250 ग्राम मिथाइल  पैराथियान या 1 किलोग्राम नीम की खली हर पेड़ की जड़ के पास की मिट्टी में मिला दें. कीड़ों को पेड़ों पर चढ़ने से रोकने के लिए जड़ से आधा मीटर ऊपर तने पर 10 सेंटीमीटर चौड़ी आस्टीको ग्रीस की पट्टी बना दें. इस से कीड़े चिकनी सतह पर नहीं चढ़ पाते हैं और पेड़ बचा रहता है. लीची के पेड़ों को कीड़ों से बचाने के लिए बारिश शुरू होने से पहले हर पेड़ की जड़ों के पास 30 सेंटीमीटर चौड़े गड्ढे खोद कर हर गड्ढे में 4 किलोग्राम नीम की खली और 1 किलोग्राम अंडी की खली को मिला कर डाल दें. पत्तियों और टहनियों को कीटों से बचाने के लिए अप्रैल में 10 मिलीलीटर मैलाथियान या 15 मिलीलीटर इंडोसल्फान या 20 ग्राम कार्बेरिल को 10 लीटर पानी में घोल कर हर पेड़ और फलों पर छिड़काव करें. अंतिम छिड़काव के 10-15 दिनों के बाद ही फलों की तोड़ाई करें. लीची माइट कीट जिन पेड़ों के तनों या पत्तियों में लगें तो उन्हें काट कर जला दें. इस से कीड़ों का फैलना बंद हो जाता है.

केले के पेड़ों के तनों में कीड़े लगने पर उन्हें काट कर खेत से हटा दें. केले के पेड़ों के गाभा में कार्बोफ्यूरान नाम की दानेदार दवा के 10-12 दाने डालें. फूल आने पर 20 किलोग्राम प्रति हेक्टेयर की दर से मैलाथियान का छिड़काव करने से केले के पेड़ों और फलों को कीड़ों के हमले से बचा सकते हैं.

पपीते के पेड़ों और फलों पर भी कई कीड़ों के हमले होते हैं. माहू इस में लगने वाला मुख्य कीड़ा है, जो पत्तियों के निचले भाग में छेद कर के उन का रस चूस लेता है. यह कई रोगों को फैलाने का भी काम करता है. इस से बचाव के लिए प्रति लीटर पानी में 2 मिलीलीटर डाईमिथोएट घोल कर छिड़काव करना कारगर होता है. चूर्णी फफूंद से बचाव के लिए प्रति लीटर पानी में 2 ग्राम साल्फैक्स घोल कर छिड़काव किया जाना चाहिए.

खरबूजे की फसल को कुम्हड़ा लाल कीड़े काफी नुकसान पहुंचाते हैं. ये कीड़े पौधों के जमने के फौरन बाद ही लगने लगते हैं, जिस से पौधे सूख जाते हैं. मैलाथियान और कार्बोरिल के पाउडर को 25 किलोग्राम प्रति हेक्टेयर की दर से राख में मिला कर सुबह के समय पौधों पर डालने से फायदा होता है. इस के अलावा 2 ग्राम कार्बोरिल और 1.5 मिलीलीटर मैलाथियान को 1 लीटर पानी में घोल कर 15 दिनों के अंतर पर छिड़काव किया जाना चाहिए.

तरबूज की फसल को भी कुम्हड़ा लाल कीड़े ही सब से ज्यादा नुकसान पहुंचाते हैं. ये कीड़े जनवरी से ले कर मार्च तक काफी नुकसान पहुंचाते हैं. तरबूज को इन कीड़ों से बचाने के लिए मैलाथियान और कार्बोरिल के पाउडर को 25 किलोग्राम प्रति हेक्टेयर की दर से राख में मिला कर सुबह के समय पौधों पर डालने से फायदा होता है. इस के अलावा 2 ग्राम कार्बोरिल और 1.5 मिलीलीटर मैलाथियान को 1 लीटर पानी में घोल कर 15 दिनों के अंतर पर छिड़काव करना चाहिए. इस प्रकार पेड़ों और फलों को कीड़ों से बचा कर किसान अपनी मेहनत का उम्दा फल हासिल कर सकते हैं.