सरिता विशेष

कलाकंद एक तरह की खोए वाली बरफी होती है. यह दूसरी तरह की तमाम बरफियों से अलग होती है. बाकी बरफियां खोए से तैयार होती हैं, पर यह दूध और छेने से तैयार की जाती है. इस की सब से खास बात यह होती है कि यह खाने में छेने और खोए दोनों के मिलेजुले स्वाद का एहसास कराती है. दानेदार बरफी होने के कारण यह दूसरी बरफियों से अलग होती है. जो किसान पशुपालन और दूध उत्पादन का काम करते हैं. वे इसे बना कर रोजगार कर सकते हैं. कलाकंद बरफी को बनाना बेहद आसान होता है. यह 5-6 दिनों तक ही सही रहती है, इसलिए इसे बनाने के बाद इस की जल्द से जल्द खपत का हिसाब लगा लेना चाहिए. कलाकंद बरफी खाने में अलग स्वाद देती है, इसलिए इसे लोग खूब पसंद करते हैं. कलाकंद बरफी दूध और खोए से भी तैयार की जाती है.

कलाकंद बरफी को बनाना भले ही आसान होता हो, पर थोड़ी सी असावधानी होने से दूध के लगने या जलने का खतरा बना रहता है, जो इस के स्वाद को खराब कर सकता है. इस में दूध और चीनी की मात्रा ऐसी होनी चाहिए, जो कलाकंद के स्वाद को बनाए रखते हुए मिठास का एहसास कराए. चीनी स्वाद के मुताबिक होनी चाहिए. इलायचीपाउडर डालने से इस की खुशबू अच्छी हो जाती है. पिस्ता, बादाम और चांदी के वर्क का इस्तेमाल कलाकंद को सजाने के लिए किया जाता है. कलाकंद बरफी को मनचाहे आकार में काटा जाता है.  

बड़ा है बाजार

कलाकंद का बाजार बड़ा है. यह छोटी से बड़ी हर मिठाई की दुकान में मिल जाती है. लखनऊ की रहने वाली मिठाइों की शौकीन जिया आहूजा कहती हैं, ‘वैसे तो कलाकंद ठंडा होने पर खाई जाती है, पर मुझे तो गरमगरम कलाकंद खाने में ज्यादा मजा देती है. कलाकंद जब ताजा होती है, तो ज्यादा अच्छी लगती है.’

कलाकंद का भाव अलगअलग होता है. यह बाजार में 250 रुपए प्रति किलोग्राम से ले कर 500 रुपए प्रति किलोग्राम तक में बिकती है. रबड़ी के बाद फ्रेश मिठाइयों में कलाकंद बरफी की मांग सब से ज्यादा होती है. लिहाजा इसे बना कर बेचना फायदेमंद होता है.

मिठाई के बाजार में कलाकंद बरफी का नाम पुराना है. अब इस की मार्केटिंग नए तरह से हो रही है. ऐसे में लोग कलाकंद बरफी की खूब खरीदारी करने लगे हैं. कुछ लोग इसे खरीद कर ले जाते हैं और फिर घरों में इस से खोए वाली गुझिया भी बना लेते हैं. ऐसे में कलाकंद बरफी की अहमियत बढ़ जाती है.

 

कैसे बनाएं कलाकंद

 

 

कलाकंद बनाने के लिए फुल क्रीम वाले दूध को लेना चाहिए. दूध को 2 हिस्सों में बांट लेना चाहिए. एक हिस्से को गरम करने के बाद उस का छेना बनाना चाहिए. छेना बनाने के लिए दूध जब उबलने लगे, तो उसे नीचे उतार लें फिर उस में नीबू के रस की 2-3 बूदें डालें. इस से छेना और दूध का पानी अलगअलग हो जाते हैं. छेना अलग करने के लिए इसे मोटे कपडे़ में छान लें.

अब बचा हुआ दूध गरम करें. उसे तब तक उबालें, जब तक कि वह गाढ़ा हो कर आधा न हो जाए. इसी दौरान उस में छेना मिला दें. इस के बाद जब यह खोए जैसा लगने लगे, तो इस में चीनी भी मिला दें. जब यह गाढ़ा हो कर बरफी जमाने लायक हो जाए तो इस में इलायचीपाउडर मिला दें. अब तैयार मिश्रण को किसी बड़े थाल में ठंडा होने के लिए फैला दें. इस के ऊपर से पिस्ता और बादाम डालें. जब यह जम जाए तो इसे अलगअलग आकार में काट लें. इसे बनाने के 4-5 दिनों में खत्म कर दें. ज्यादा दिन रोकने इस का जायका बिगड़ जाता?है.