5 राज्यों के विधानसभा चुनावों में देश का सब से बड़ा किसान वर्ग किसी राजनीतिक दल के एजेंउे में नहीं है. जो लोग किसानों की बात कर भी रहे हैं, वे उन को बरगलाने का काम कर रहे हैं. कोई कर्ज देने की बात कर रहा है, तो कोई कर्ज माफ कराने का दम भर रहा है. केंद्र में सरकार चला रही भाजपा तो किसानों को खेत की माटी का तिलक लगा कर रिझाने की कोशिश कर रही है. किसान चाहते?हैं कि उन की पैदावार बेकार न हो. उस का पूरा दाम मिले. ऐसे मुद्दे किसी पार्टी के लिए अहम नहीं रह गए हैं. किसानों को चाहिए कि वे जाति और धर्म की बातें छोड़ कर किसानी के मुद्दों को ले कर एकजुट हो कर वोट करें. तभी वे चुनाव में मुद्दा बन सकेंगे. 

COMMENT