वर्ष 2014 के चुनावों के अंतिम दौर में नरेंद्र मोदी पर जो तीखे हमले हुए और जिस तरह के लचर जवाब उन्होंने दिए उस से साफ है कि चुनावों के परिणाम चाहे जो भी हों, जिस तरह के कट्टर, तानाशाही, हिंदुत्व राज की कल्पना नरेंद्र मोदी भक्त कर रहे थे, वह साकार नहीं होगी.
नरेंद्र मोदी के भक्तों में ज्यादातर वे हैं जो विकास के नाम पर देश में एक बार फिर वर्णव्यवस्था वाला शासन थोपना चाहते हैं जिस में ऊंचनीच का फैसला शास्त्रीय ग्रंथों के अनुसार जन्म के समय ही हो जाए और सुखदुख की चाबी पोथी बगल में दबाए किसी तिलकधारी के हाथों में हो. ऐसा हिंदू राज इस देश में न कभी था और न संभव है. रामायण, महाभारत काल में भी केवल जनता ही नहीं राजा भी सुखी न थे क्योंकि ये दोनों महाकाव्य 2 राजघरानों पर आई आफतों का ही वर्णन हैं.
इन दोनों ग्रंथों में वर्णित हिंदू आदर्श पात्र, जिन में से कुछ के आज मंदिर बना उन को पूजा जाता है, अपने पूरे जीवन अस्तित्व के लिए संघर्ष करते रहे और वे अपने राज, संपत्ति, सम्मान की रक्षा भलीभांति न कर पाए, आम जनता की रक्षा भला उन्होंने क्या की होगी, उस की बात छोडि़ए.
यह विडंबना ही है कि जब ये महाकाव्य तब की काल्पनिक स्थिति का खासा सूक्ष्म वर्णन करते हैं और उस युग की जनता की त्रासदी का थोड़ा सा ही वर्णन करते हैं, राजसी पात्रों की तो बात छोडि़ए जो बहुत कर्णप्रिय नहीं हैं, तो इन पर आज विकास का मौडल कैसे बनाया जा सकता है?
नरेंद्र मोदी के साथ अब यह कठिनाई भी साफ दिख रही है कि वे अकेले भी पड़ गए हैं. वे तानाशाह बनना चाहते थे पर इस चक्कर में अमित शाह जैसे दोषी व्यक्ति और वकील रवि शंकर प्रसाद के अलावा केवल कुछ अनजान से चेहरे ही उन के साथ हैं. भाजपा के ज्यादातर वरिष्ठ नेता नरेंद्र मोदी को बचाने में कोई रुचि नहीं ले रहे. राजनाथ सिंह भी शायद मन ही मन नाराज हों क्योंकि लखनऊ में नारे लग रहे हैं कि नरेंद्र मोदी को जिताना है तो राजनाथ सिंह को हराना है.
एक देश का प्रधानमंत्री बनने के लिए अपनी पूरी पार्टी को साथ ले कर चलना तो जरूरी है, साथ ही योग्य व्यक्ति भी साथ होने चाहिए. ममता बनर्जी, जयललिता, लालू प्रसाद यादव, मुलायम सिंह यादव, देवी लाल, ओमप्रकाश चौटाला, बाल ठाकरे यदि अपने सीमित क्षेत्रों से निकल नहीं पाए तो इसीलिए कि उन के पास अपने व्यक्तित्व या खुद के निजी नारे के अलावा कुछ नहीं था जो उन्हें अखिल भारतीय नेता बनाता.
नरेंद्र मोदी ने भारतीय जनता पार्टी का गुजरातीकरण कर दिया है और उन की विजय चाहे जैसी भी हो, यह उन पर भारी पड़ेगी, बहुत भारी.