सरिता विशेष

महामहिम कोई आम आदमी नहीं होता, इसलिए वह कभी ट्रेन में सफर नहीं करता. उस के लिए एक खास तरह की 2 डब्बों वाली ट्रेन अलग से बनाई जाती है जिसे रेलवे सैलून कहता है. 8 करोड़ रुपए की कीमत वाले इस सैलून को चलता फिरता आलीशान महल कहा जा सकता है जिस में आधुनिक तकनीक युक्त तमाम सुविधाएं होती हैं. नए राष्ट्रपति के लिए कीमती सैलून बन रहा है. दोटूक कहा जाए तो करोड़ों रुपए फुजूल खर्च किए जा रहे हैं, क्योंकि इस सैलून का इस्तेमाल यदाकदा ही राष्ट्रपति करते रहे हैं. 1977 में नीलम संजीव रेड्डी के बाद सैलून का उपयेग सादगी और किफायत की प्रतिमूर्ति कहे जाने वाले राष्ट्रपति एपीजे अब्दुल कलाम ने किया था. अभी तक के राष्ट्रपतियों ने कुल 87 बार ही इस सैलून में सफर किया है. लोकतंत्र और राजशाही की चर्चा से दूर बेहतर होगा कि नए राष्ट्रपति इस फुजूलखर्च से परहेज कर मिसाल कायम करें.