तिरुपति बालाजी मंदिर की कथा बड़ी दिलचस्प है जिस के तहत यहां चढ़ाया गया पैसा विष्णु देवता के पास नहीं बल्कि धन के देवता लेकिन जाति के राक्षस कुबेर के पास पहुंचता है क्योंकि उस ने विष्णु की मांग पर उस की शादी के लिए एक तरह से कुछ शर्तों पर पैसा दिया था जिसे सहूलियत के लिए मैरिज लोन कहा जा सकता है.  इस प्रसंग का वर्तमान लोकतंत्र से भी संबंध स्थापित होता लगने लगा है. आम लोगों का बचाखुचा पैसा नोटबंदी के बाद कहां और किन कुबेरों के पास जा रहा है, यह किसी की समझ में नहीं आ रहा. प्रधानमंत्री नरेद्र मोदी बीते दिनों तिरुपति बालाजी के मंदिर पहुंचे और परंपरागत पोशाक पहन पूजन किया तो भी यह तय कर पाना मुश्किल था कि कौन किस की पूजा कर रहा है. मोदीजी ने क्या मांगा, यह तो वही जानें लेकिन दूर कहीं कंदराओं में बैठे कुबेर ने जरूर यहां दुआ की होगी कि हे मोदी, तुम मुझे क्यों डिजिटल किए दे रहे हो.

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