सरिता विशेष

देश में दूरसंचार क्षेत्र की क्रांति का लाभ मोबाइल निर्माता तथा मोबाइल फोन सेवाप्रदाता कंपनियां खूब उठा रही हैं. यह बाजार वैश्विक और घरेलू मोबाइल कंपनियों के लिए भारत में सर्वाधिक आकर्षक का है. इस का फायदा अब सरकारी क्षेत्र की कंपनी भारत संचार निगम लिमिटेड यानी बीएसएनएल अलग तरीके से उठाने का प्रयास कर रही है.

बीएसएनएल तथा महानगर टैलिफोन निगम लिमिटेड यानी एमटीएनएल की सेवाएं अच्छी नहीं हैं और दोनों कंपनियां निजी क्षेत्र की कंपनियों की प्रतिस्पर्धा में भी नहीं हैं, फिर भी ग्राहकों का उन कंपनियों पर काफी विश्वास है. उन्हें लगता है इन कंपनियों में अनावश्यक लूट नहीं है. हालांकि उन के अधिकारी व कर्मचारी अपनी इस जिम्मेदारी का निर्वहन ग्राहकों के विश्वास के अनुकूल नहीं कर रहे हैं.

बीएसएनएल के पास जबरदस्त ढांचागत सुविधा है. देश के हर कोने में उस के टावर लगे हैं. इस सुविधा का फायदा उठाते हुए सरकार ने मोबाइल टावर का कारोबार करने और राजस्व अर्जित करने का इसे नया जरिया बनाने की योजना बनाई है. इस के लिए मंत्रिमंडल ने अलग से टावर कंपनी बनाने का फैसला किया है.

बीएसएनएल के पास 66 हजार से ज्यादा मोबाइल टावर हैं जो कुल टावरों का 15 फीसदी से ज्यादा है. विभिन्न कंपनियों के देशभर में 4 लाख 42 हजार टावर हैं. अपने टावरों के जरिए बीएसएनएल कारोबार बढ़ाएगी और अपनी हिस्सेदारी जल्द ही ज्यादा करेगी.

यह सरकारी संपत्ति का राजस्व अर्जन के लिए अच्छा प्रयास है लेकिन सवाल यह है कि जिस कंपनी के पास इतनी बड़ी तादाद में टावर हैं, आखिर वह सेवाप्रदाता कंपनियों के साथ तगड़ी प्रतिस्पर्धा क्यों नहीं बना पा रही है.