सरिता विशेष

हमारे यहां विकलांगों की आबादी बहुत बड़ी है. पिछली जनगणना के अनुसार देश में इन की आबादी 2.21 प्रतिशत है. मतलब यह कि हमारी कुल आबादी में 2 करोड़ से अधिक लोग विकलांग हैं. सरकारी नौकरियों में इस वर्ग के लिए आरक्षण की व्यवस्था है लेकिन अब नौकरियों का हिसाब बदल गया है. सरकारी क्षेत्र में नौकरियां नहीं के बराबर हैं. जिस स्तर पर हैं वहां प्रतिस्पर्धा है और कोटा यानी आरक्षण का मामला है, उस से आम आदमी की स्थिति खराब है. इन की हालत और भी बदतर हो सकती है.

निजी क्षेत्र इन को नौकरी देने के लिए बहुत उत्साहित नजर नहीं आता है. सरकार ने इस दिशा में ठोस पहल करते हुए निजी क्षेत्र को इन को रोजगार देने का आग्रह किया है और कहा है कि इस के लिए भविष्यनिधि (पीएफ) तथा अस्पताल सुविधा यानी ईएसआई के लिए कटने वाला पैसा सरकार देगी. यही नहीं, कर्मचारी की एकतिहाई ग्रेच्युटी भी सरकार ही देगी. इन लोगों के जीवनस्तर में सुधार के लिए सरकारी स्तर पर की गई यह महत्त्वपूर्ण घोषणा है. इस से निजी क्षेत्र विकलांगों को नौकरी देने में रुचि लेगा और इन के लिए निजीक्षेत्र में नौकरी पाना आसान हो जाएगा.

सरकार की इस घोषणा के बाद सुविधा में गड़बड़ी नहीं हो, यह सुनिश्चित किया जाना चाहिए. इस के साथ ही यह ज्यादा उपयुक्त होगा कि सरकार निजी क्षेत्र में विकलांगों के लिए प्रोत्साहन योजना शुरू करे. इस के तहत विकलांगों के लिए नौकरी देने वाली कंपनी को कर आदि में छूट की सुविधा भी दी जानी चाहिए. इस तरह से निजी क्षेत्र का उत्साह बढ़ेगा और ऐसे व्यक्तियों को रोजगार के अवसर मिलेंगे, जिस से उन के जीवनस्तर में सुधार आएगा.

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