सरिता विशेष

हर समाज की ही तरह बौलीवुड में बड़ी मछली छोटी मछली को खा जाती है. मगर बौलीवुड में पिछले दस वर्ष के अंतराल में दूसरी बार ऐसा हो रहा है, जब बौलीवुड से जुड़े एक अतिशक्तिशाली परिवार की तीसरी पीढ़ी को दो बार गुमनामी के अंधेरे में दुबकने पर मजबूर होना पड़ा हो, फिर भी वह चुप हो.

यह कोई कोरी कल्पना नही है, बल्कि बौलीवुड का एक ऐसा सच है, जिस पर ‘‘सरिता’’ पत्रिका आज पहली बार परदा उठा रही है. क्योंकि इस सच को जानते हुए भी बौलीवुड से जुड़े किसी भी शख्स ने कभी कोई आवाज नहीं उठाई.

चलिए, सबसे पहले तो हम उस शख्स का नाम उजागर कर देते हैं, जिससे जुड़ा यह सच है. जी हां यह शख्स कोई और नहीं बल्कि बौलीवुड के सर्वाधिक सफल व सामाजिक फिल्मों के सर्जक स्व. बलदेव राज चोपड़ा उर्फ बी आर चोपड़ा के पोते यानी कि फिल्म सर्जक स्व. रवि चोपड़ा के बेटे तथा स्व.बलदेव राज चोपड़ा के सबसे छोटे भाई व फिल्मकार स्व. यश चोपड़ा के भी पोते और फिल्मकार आदित्य चोपड़ा के भतीजे अभय चोपड़ा हैं,

जिनके निर्देशन में बनी नई फिल्म ‘‘इत्तफाक’’ 3 नवंबर को प्रदर्शित होने वाली है.मगर अभय चोपड़ा को दस वर्ष के अंतराल में दूसरी बार गुमनामी के अंधेरे में दुबकने पर मजबूर होना पड़ा है.

सूत्रों के अनुसार अभय चोपड़ा ने अपने दादा व पिता की ही भांति बौलीवुड में फिल्मकार के रूप में खुद को स्थापित करने के लिए विदेश में पढ़ाई की थी. विदेश में पढ़ाई के ही दौरान अभय चोपड़ा की दोस्ती मशहूर फिल्म सर्जक व अभिनेता स्व.राज कपूर के पोते और अभिनेता रिषि कपूर के बेटे रणबीर कपूर से हुई थी.

सूत्रों के अनुसार विदेश से मुंबई वापस लौटने के बाद अभय चोपड़ा ने एक फिल्म ‘‘आखिरी फैसला’’ का निर्माण, लेखन व निर्देशन किया था. इस फिल्म का काफी हिस्सा मुंबई से सटे ठाणे के सेंट्रल जेल में फिल्माया गया था. फिल्म आखिरी फैसला में हीरो के रूप में मुख्य भूमिका रणबीर कपूर ने निभायी थी.

फिल्म में सुरेंद्र पाल और शरत सक्सेना की भी अहम भूमिकाएं थी. सूत्र दावा करते है कि इस फिल्म में वर्तमान समय में अभिनेता के रूप में शोहरत बतौर रहे अर्जुन कपूर सहायक निर्देशक के रूप में काम करते हुए क्लैप देने का काम किया था.

सूत्र बताते हैं इस फिल्म को किसी अंतरराष्ट्रीय फिल्म समारोह में पुरस्कृत भी किया गया था. मगर फिल्म ‘‘आखिरी फैसला’’ सिनेमाघरों में प्रदर्शित हो पाती, उससे पहले ही रणबीर कपूर को फिल्म्कार संजय लीला भंसाली की बड़ी फिल्म ‘‘सांवरिया’’ मिल गयी. फिल्म ‘‘सांवरिया’’ को रणबीर कपूर की लौंचिंग फिल्म के रूप में प्रचारित किया गया.

9 नवंबर 2007 को ‘‘सांवरिया’’ प्रदर्शित हुई थी, जिसे दर्शकों ने नकार दिया था. उधर अभय चोपड़ा निर्देशित फिल्म ‘‘आखिरी फैसला’’ कहां गयी, आज तक किसी को कुछ पता नहीं चला.

सूत्र दावा करते हैं कि फिल्म सांवरिया की शुरूआत जब हुई, तब तक अभय चोपड़ा के पिता रवि चोपड़ा आर्थिक संकट से गुजर रहे थे, पर वह हार मानने की बजाय हर मुसीबत से जूझते हुए नई फिल्में भी बना रहे थे.

रवि चोपड़ा की एक फिल्म‘‘बंदा यह बिंदास है’’तो अदालती चक्कर में 2009 में फंसी थी और यह फिल्म आज तक प्रदर्शित नहीं हो पायी. जबकि 12 नवंबर 2014 को रवि चोपड़ा का देहांत हो गया था.

सूत्र तो कई तरह की कहानी सुना रहे हैं, वह कितनी सच हैं, पता नहीं मगर हालात से लोग समझ सकते हैं कि क्यों 2007 में अभय चोपड़ा को गुमनामी के अंधेरे में दुबकना पड़ा था. अब पूरे दस वर्ष बाद एक बार फिर इतिहास दोहराया जा रहा है, पर उसकी शक्ल थोड़ी सी बदली हुई है.

1969 में बलदेव राज चोपड़ा ने ‘‘बी आर फिल्मस’’ के बैनर तले एक फिल्म ‘‘इत्तफाक’’ का निर्माण किया था, जिसका निर्देशन यश चोपड़ा ने किया था. अब 1969 की फिल्म ‘‘इत्तफाक’’ से प्रभावित होकर  इसी नाम से फिल्म का निर्माण किया गया है,जिसके पटकथा लेखक व निर्देशक अभय चोपड़ा हैं.

तीन नवंबर को प्रदर्शित हो रही इस फिल्म‘‘इत्तफाक’’की कहानी अभय चोपड़ा ने श्रेयश जैन व निखिल मेहरोत्रा के साथ मिलकर लिखी है. फिल्म का निर्माण करण जोहर, गौरी खान, रेणु रवि चोपड़ा, हीरु यश जोहर ने किया हैं. (यहां ध्यान देने वाली बात यह है कि हीरू यश जोहर, स्व. बलदेव राज चोपड़ा की सबसे छोटी बहन हैं. इस आधार पर रिश्ते में हीरू यश जोहर, अभय चोपड़ा की बुआ दादी और करण जोहर, अभय चोपडा के चाचा लगते हैं.)

अभय चोपड़ा निर्देशित फिल्म ‘‘इत्तफाक’’ में सिद्धार्थ मल्होत्रा, अक्षय खन्ना और सोनाक्षी सिन्हा की अहम भूमिकाएं हैं. मगर इस फिल्म के ट्रेलर लौंच के साथ ही करण जोहर की कंपनी ‘धर्मा प्रोडक्शन’ की तरफ से कह दिया गया कि वह इस रहस्य प्रधान फिल्म को किसी भी माध्यम पर प्रमोट नहीं करेंगे.

यानी कि फिल्म ‘‘इत्तफाक’’ का ट्रेलर जरुर लोगों के सामने है. अन्यथा इस फिल्म को लेकर इस फिल्म से जुड़े किसी भी शख्स ने मीडिया से कोई बात नहीं की. फिल्म को प्रमोट करने के लिए अब तक कोई गतिविधि नहीं गयी?

अब यदि इस फिल्म ने बाक्स औफिस पर रिकार्ड तोड़ सफलता दर्ज करा दी, तब तो लोग पूछेंगे कि फिल्म का निर्देशक कौन है अन्यथा एक बार फिर नुकसान अभय चोपड़ा का होगा. यानी कि एक बार फिर अभय चोपड़ा गुमनामी के अंधेरे कोने में दुबकने के लिए मजबूर होंगे.

इस तरह सूत्र इस तरफ इशारा तो कर रहे हैं कि एक बार फिर इतिहास अपने आपको दोहरा रहा है. पर हमारे सूत्र यह नहीं बता रहे हैं कि इस बार अभय चोपड़ा को गुमनाम अंधेरे कोने में दुबकने के लिए किसने या किन हालातों ने मजबूर किया है. आखिर अभय चोपड़ा खुद मीडिया के सामने क्यों नहीं आ रहे हैं

अब अभय चोपड़ा के मन में क्या चल रहा है, यह तो वही बेहतर जानें…