AI and Humans: एक बहस छिड़ी हुई है कि क्या एआई लोगों को मार सकती है? इस डिबेट में कुछ इंजीनियर्स भी शामिल हैं जिन्हें डर है कि एआई इतना पावरफुल हो सकता है कि वह लोगों को मार सके. यह सब्जैक्ट बड़ा कौम्पलैक्स है लेकिन यह कहा जा सकता है कि ह्यूमन एक्सपीरियंस यह रहा है कि हर वह चीज जो लाइफ को ईजी बनाती है, लाइफ को डैंजर में डाल भी सकती है.
एयरोप्लेन्स ने इधर से उधर जाना ईजी कर दिया लेकिन इन्हीं एयरोप्लेन्स से सैकंड वर्ल्ड वार और उस के बाद की कितनी ही वार्स में सैकड़ों को नहीं, लाखों को मारा गया और शहरों को रुइन्स में कन्वर्ट कर दिया गया. आज ईरान-अमेरिका लड़ाई में एयरोप्लेन्स की बड़ी इम्पौर्टेंस है.
एटम को ढंग से ब्रेक कर के, फ्यूजन कर के एनर्जी में कन्वर्ट किया जा सकता है. एल्बर्ट आइंसटाइन ने इस का फार्मूला पहले ही बता दिया था. लेकिन उसी थ्योरी पर बने एटमबमों ने जापान के हिरोशिमा और नागासाकी पर हजारों की कुछ सैकंड़ों में जान ले ली.
एआई ह्यूमन क्रिएशन है. यह बहुत से लोगों को रिप्लेस कर सकती है, जैसे एक ट्रेन ड्राइवर 100-200 हौर्स ड्रिवन कोचों को रिप्लेस कर सकता है और सैकड़ों को अनएंप्लौय कर सकता है. पर ईज औफ ट्रैवल की मांग है कि हम उन कोचों की न सोचें, बल्कि इंजिन ड्राइवर की ही सोचें.
यही एआई के साथ है. यह लोगों को तभी किल कर सकता है जब कोई ह्यूमन उसे सिखा दे कि उसे ह्यूमन को किल करने में हिचक नहीं होनी चाहिए. पर यह ट्रेनिंग तो हम हमेशा से हर सोल्जर को देते रहे हैं. किल और बी किल्ड. बिना एआई के भी लाखों को मारा गया है.
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