EWS Reservation: प्रकृति नियमों से काम करती है. प्रकृति के नियमों को समझ कर उन्हें मानवता की प्रगति के लिए इस्तेमाल करना ही विज्ञान का काम है और इन्हीं नियमों के अनुरूप सभ्यताओं का विकास करने की समझ ही मनुष्य की नैतिकता है. इस नैतिकता के बिना दुनिया में कोई तरक्की संभव ही नहीं. स्पेस साइंस, मेडिकल साइंस, इंजिनियरिंग, एआई, इंटरनेट और मैनेजमेंट इसी नैतिकता पर चलते हैं और यह नैतिकता शिक्षा से आती है.
किसान जानता है कि अगर बीज बोने के बीस दिन बाद पानी नहीं दिया तो फसल मर जाएगी. चाहे किसान ब्राह्मण हो या दलित, बारिश किसी की जात नहीं देखती, बिजली किसी की गोत्र नहीं देखती. नंगे तार को अमीर छुएगा तो भी मरेगा, गरीब छुएगा तो भी मरेगा. यही विज्ञान है और इसी विज्ञान को जिंदगी में उतारना नैतिकता है. सुबह का शौच कोई टाल नहीं सकता, बिना कदम बढ़ाए कोई दिल्ली नहीं पहुंच सकता, बिना तार जोड़े बल्ब नहीं जलता. ये सब कुदरत के अनुशासन हैं. इसी अनुशासन को जब हम समाज में लगाते हैं तो वह नैतिकता बन जाता है.
अब सवाल यह है कि जो स्टूडेंट EWS के फार्म में अपनी गलत आय बताकर और अपनी असली संपत्ति छुपाकर फार्म भरता है और वह इस अनैतिकता से सरकारी नौकरी हासिल कर अफसर बन जाता है तो क्या वह नैतिक रह पायेगा? शिक्षा, ब्यूरोक्रेसी और राजनीती में इस अनैतिक रास्ते से अनैतिक लोगों की घुसपैठ होगी तो क्या सिस्टम करप्ट लोगों का जमावड़ा नहीं बनेगा? और क्या ऐसे करप्ट लोगों के जमावड़े से कोई देश तरक्की कर पायेगा? व्यवस्था चलाने वाले लोग ही अगर गलत रास्ते से सिस्टम में आएंगे तो क्या देश आगे बढ़ पायेगा?
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