कहने को इसे महज एक इत्तफाक कहा जा सकता है कि अमेरिकी स्पेस एजेंसी नासा का यान मार्स ऐटमौस्फियर ऐंड वोलाटाइन एवोल्यूशन (मावेन) और भारतीय स्पेस एजेंसी इसरो का मार्स और्बिटर मिशन लगभग साथसाथ मंगल तक पहुंचे लेकिन इन की तुलना बताती है कि कई चीजें इस कोरे इत्तफाक से परे हैं, जैसे 4026 करोड़ रुपए के खर्च से मंगल तक पहुंचे मावेन के मुकाबले करीब 10 गुना कम लागत (450 करोड़ रुपए) वाले मार्स और्बिटर का पहले ही प्रयास में सफल होना कोई संयोग नहीं है. इस के पीछे राजनीतिक इच्छाशक्ति और ठोस वैज्ञानिक इरादों के अलावा व्यापार की सोचीसमझी रणनीति काम कर रही है जो भारत जैसे एक गरीब देश को किफायत में अंतरिक्ष मिशन चला कर स्पेस से कमाई के मौके दिला रही है.

Tags:
COMMENT