Romantic Story in Hindi : राजेश और प्रज्ञा एकदूसरे की ओर खिंचे जा रहे थे. दिल ने दिल की भाषा पढ़ ली थी. फिर क्यों इन दोनों चाहने वालों की चाहत अधूरी ही रह गई?
प्रज्ञा जब अस्पताल पहुंची तब तक राजेश की हालत और खराब हो चुकी थी. उसे कुछ दिनों पहले ही समाचार मिल गया था कि राजेश अस्पताल में भरती है लेकिन वह जानबूझ कर अनदेखा करती रही, ‘उसे क्या लेना राजेश से’ वह मन में सोचती लेकिन सच यह था कि ऐसा सोच लेने के बाद भी उस का मन राजेश में ही लगा था.
भले ही वह सालों पहले राजेश से दूर हो चुकी हो पर राजेश था तो उस का पहला प्यार. उस ने उस के साथ जाने कितने हसीन पल गुजारे हैं. उस की आंखों के सामने एकएक दृश्य सजीव होते चले गए.
‘सुनिए मिस्टर, आप जो इस तरह मेरा पीछा कर रहे हैं न, यह ठीक नहीं है.’
राजेश घबरा गया, ‘पीछा, नहीं मैम, आप को कुछ गलतफहमी हुई है.’
‘कोई गलतफहमी नहीं हुई है. मैं आप जैसे लड़कों को अच्छी तरह जानती हूं,’ वह गुस्से से लाल हो चुकी थी.
राजेश कुछ नहीं बोला, अपनी आंखें झकाए वह निकल गया.
प्रज्ञा बहुत देर तक उसे जाते हुए देखती रही. उसे वाकई उस पर तेज गुस्सा आ रहा था. उसे लग रहा था कि राजेश जानबूझ कर बारबार उस के सामने आ रहा है.
वैसे यह तो सच ही था कि राजेश कई बार उस के सामने से निकल रहा था पर ऐसा वह जानबूझ कर नहीं कर रहा था. वह तो प्रज्ञा को जानता तक नहीं था. दरअसल, प्रज्ञा उस के महल्ले में रहने के लिए कुछ ही दिनों पहले आई थी. किसी कंपनी में उस की फर्स्ट जौइनिंग हुई थी. राजेश भी किसी कंपनी में नौकरी करता था और वह भी इसी महल्ले में एक कमरे में रह रहा था.
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