Social Story in Hindi : मिस्टर थौमस ने अपने पिताजी से जो सीख ली थी, उस के बाद संकल्प ले लिया था ज्ञान का दीपक जलाने का. उन के ज्ञान की रोशनी ने कितने ही घरों में उजाला कर दिया था.

मिस्टर थौमस की नींद रोज सुबह 5 बजे खुल जाती थी. बिस्तर में करवटें बदलतेबदलते साढ़े 5 बज जाते थे. साइड की टेबल पर रखे मोबाइल पर मैसेज की आवाजें उन को आकर्षित नहीं कर पाती थीं. वे सोचते थे न जाने लोग सुबहसुबह मोबाइल ले कर कैसे बैठते हैं घंटोंघंटों.

वे साढ़े 5 बजे बिस्तर छोड़ देते. हलके गरम पानी में नीबू निचोड़ कर पीते. फिर अपने बंगले के लौन में टहलने लगते. वे जानते थे गार्डन में अभी हैल्दी जूस वाला नहीं आया होगा, सुबह लगभग 7 बजे वह अपनी शौप खोलता है. ढेरों पौष्टिक जूस होते हैं- एलोवेरा, आंवला, नीम, लौकी वगैरहवगैरह, वे साढ़े 6 बजे गार्डन की तरफ निकल गए.

गार्डन में रोज की तरह चहलपहल थी. जूस पीने वालों की कतार थी. स्वास्थ्य के प्रति सजग है पब्लिक, सुखद है. चिडि़यों की आवाजें हवाओं में संगीत घोल रही थीं. ठंडीठंडी हवाएं शरीर को भली लग रही थीं. मिस्टर थौमस ने भी अपना पसंदीदा जूस पिया और गार्डन की एक बैंच पर बैठ गए.

महीनेभर पहले गार्डन में एक डौगी ने बच्चे दिए थे. छोटेछोटे पिल्ले घूम रहे थे. वाक करने वालों के पैरों से टकरातेटकराते बच रहे थे. कुछ लोग दूधबिस्कुट दे जाते थे. डौगी खुश थी अपने बच्चों के साथ. किसी बैंच के नीचे बैठ जाती तो बच्चे उस के ऊपर चढ़ जाते, उस को यहांवहां काटने लगते. डौगी शांति से बैठी बच्चों के प्यार को महसूस कर रही थी. मि. थौमस ने बैंच से उठ कर गार्डन में वाक करना शुरू किया.

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