Parenting Perspective : वयस्क बेरोजगार बच्चे मातापिता के लिए एक परेशानी बने रहते हैं. यह वित्तीय तनाव, रिश्तों में खटास और भावनात्मक बोझ का कारण बन जाता है क्योंकि मातापिता अपने बच्चों की जरूरतें पूरी करते हुए खुद को फंसा हुआ महसूस करते हैं.
27 वर्षीय साहिल ने इंजीनियरिंग की पढ़ाई की है और अभी वह बेरोजगार है. उस का कहना है कि वह अपने पेरैंट्स के साथ रहता है, जो उसे शर्मनाक लगता है. वैसे, उस के पेरैंट्स कुछ बोलते नहीं हैं, पर उन के हावभाव से लगता है कि जैसे वह उन पर एक बोझ है. साहिल ट्यूशन पढ़ा कर इतना तो कमा लेता है कि जिस से वह अपना मोबाइल बिल और बाइक में पैट्रोल भरा सके.
साहिल चाहता है कि वह अपने पेरैंट्स की आर्थिक रूप से मदद कर सके और भविष्य में उन का सहारा बन सके. इस के लिए वह एक अच्छी जौब की तलाश में है लेकिन केवल इंजीनियरिंग की डिग्री से उसे कोई अच्छी जौब मिल नहीं रही है.
साहिल के एक दोस्त ने उसे सुझया कि क्यों न वह एमबीए (मास्टर औफ बिजनैस एडमिनिस्ट्रेशन) का कोर्स कर ले, फिर खुद उसे बड़ीबड़ी कंपनियों से जौब के औफर आने लगेंगे लेकिन साहिल के पास इतने पैसे नहीं हैं कि जिस से वह आगे की पढ़ाई कर सके. यह भी पता है उसे कि उस के पेरैंट्स अब उस पर एक रुपया भी खर्च नहीं करेंगे.
भारत में इंजीनियरों की समस्या गंभीर है. यहां हर साल लाखों छात्र इंजीनियरिंग की डिग्री लेते हैं. उन में से एक बड़ा प्रतिशत नौकरी या इंटर्नशिप से वंचित रह जाता है. एक ताजा रिपोर्ट के अनुसार, भारत में 2024 बैच के 83 फीसदी से अधिक इंजीनियरिंग स्नातकों को नौकरी या इंटर्नशिप नहीं मिली.
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