तुम कुछ कहना चाहती हो

मगर तुम खामोश ही रहना

तुम बोलोगी तो

अधरों को जुम्बिश होगी

तुम्हारी हंसीखामोशी का नूर

चांद चुरा लेगा

मैं ठगा सा रह जाऊंगा

तुम्हें तो मुसकरा कर चूम लूंगा

मगर चांद को बहला नहीं पाऊंगा

इसलिए तुम खामोश ही रहना

तुम बोलोगी तो

तुम्हारी खनकती आवाज

एक तरन्नुम बन जाएगी

हवा की सरगोशियों में उलझ जाएगी

तुम्हें तो मैं कान के बुंदे

और ताजमहल की रेप्लिका दे कर

पा लूंगा मोहब्बत की जागीर

मगर निगोड़ी हवा को

आंख नहीं दिखा पाऊंगा

इसलिए तुम खामोश ही रहना

सच कहूं तो तुम्हारी खामोशी

मुझे भली सी लगती है

आई लव यू, आई एम फोर यू

आई विल बी फोर यू फोरएवर

ये सबकुछ तो बोल दिया है मैं ने

अब तुम्हारी खामोशी में

इजहार है, इनकार और इकरार भी

तुम्हारी खामोशी सुनने के लिए

खुद खामोश हो रहा हूं

तुम भी खामोश ही रह

आगे की कहानी पढ़ने के लिए सब्सक्राइब करें

डिजिटल

(1 साल)
USD99USD49
 
सब्सक्राइब करें

सरिता सब्सक्रिप्शन से जुड़ेें और पाएं

  • सरिता मैगजीन का सारा कंटेंट
  • देश विदेश के राजनैतिक मुद्दे
  • 7000 से ज्यादा कहानियां
  • समाजिक समस्याओं पर चोट करते लेख
 

डिजिटल + 24 प्रिंट मैगजीन

(1 साल)
USD150USD129
 
सब्सक्राइब करें

सरिता सब्सक्रिप्शन से जुड़ेें और पाएं

  • सरिता मैगजीन का सारा कंटेंट
  • देश विदेश के राजनैतिक मुद्दे
  • 7000 से ज्यादा कहानियां
  • समाजिक समस्याओं पर चोट करते लेख
  • 24 प्रिंट मैगजीन
और कहानियां पढ़ने के लिए क्लिक करें...