Hindi Poem : गरमी की छुट्टी में हाथी, घूमने गया पहाड़।
उसके बच्चे लगे कांपने,सुन शेरों की दहाड़।।
मत घबराओ मेरे बच्चे, मैं अभी तेरे साथ।
मुसीबतों में रहो तैयार, करने एक दो हाथ।।
नहीं चलेगी शेरों की अब,ओछी गीदड़ भभकी।
हमसब ने भी यह ठाना है, बदला लेंगे अबकी।।
हर जीवों से जंगल शोभित,समझें वन के राजा।
जंगल के नियमों को मानें, बज जाएगी बाजा।।
हाथी ने भी खूब पिलाया, इन शेरों को घुट्टी।
बच्चों ने क्या खूब मनाया, अबकी गरमी छुट्टी।
लेखक : डॉ पुष्प कुमार राय
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