तुम ने मुझे छुआ तो बदन जगमगा गया

कोई जला चराग, सहन जगमगा गया

ये फूल कौन सा तेरे माथे पे खिल गया

गुजरे इधर से तुम जो, चमन महमहा गया

इस दर पे तेरा नाम हवाओं ने लिखा था

खुशबू के बोझ से ये बदन थरथरा गया

इतनी थी आरजू कि मेरे दर पे वो रुकें

आए जो मुकाबिल तो कदम डगमगा गया

चलते हो धूप में कभी साए में बैठ लो

देखो तो किस तरह ये बदन तमतमा गया

हम ने तो उस परी से कोई बात भी न की

किस के ये बोल थे कि बदन गुनगुना गया.

 

- राकेश भ्रमर

आगे की कहानी पढ़ने के लिए सब्सक्राइब करें

डिजिटल

(1 साल)
USD99USD49
 
सब्सक्राइब करें

सरिता सब्सक्रिप्शन से जुड़ेें और पाएं

  • सरिता मैगजीन का सारा कंटेंट
  • देश विदेश के राजनैतिक मुद्दे
  • 7000 से ज्यादा कहानियां
  • समाजिक समस्याओं पर चोट करते लेख
 

डिजिटल + 24 प्रिंट मैगजीन

(1 साल)
USD150USD129
 
सब्सक्राइब करें

सरिता सब्सक्रिप्शन से जुड़ेें और पाएं

  • सरिता मैगजीन का सारा कंटेंट
  • देश विदेश के राजनैतिक मुद्दे
  • 7000 से ज्यादा कहानियां
  • समाजिक समस्याओं पर चोट करते लेख
  • 24 प्रिंट मैगजीन
और कहानियां पढ़ने के लिए क्लिक करें...