Emotional poem: रूठ रही है किस्मत मेरी, लुटने के आसार
काँप रहा है खूब कलेजा, अम्मा है बीमार!!!

अम्मा के सिरहाने बैठे
बाबा आँसू घूँटें
अपलक देखें मुख अम्मा का
तिनका तिनका टूटें

उन्हें पता है दरक रहा है, उनका तो दरबार
काँप रहा है खूब कलेजा, अम्मा है बीमार !!!

बीस किलो की अम्मा लगतीं
भैया जी को भारी
हस्पताल की फीस लगे है
भाभी जी को आरी

कहतीं हैं दो बच्चे मेरे, मुझ पर उनका भार
काँप रहा है खूब कलेजा, अम्मा है बीमार!!!

जिनके मल को और मूत्र को
अम्मा गंगा मानी
जिन बेटों को सूखा रखने
तन की छाता तानी

उन बेटों का गीली मां को, छूने से इनकार
काँप रहा है खूब कलेजा, अम्मा है बीमार !!!

मैं घर की अनब्याही बेटी
थर थर थर थर कांपू
बिन अम्मा के जीवन को जब
आँख मूंदकर भांपू

अम्मा के जीवित रहने तक , हैं मेरे अधिकार
काँप रहा है खूब कलेजा, अम्मा है बीमार !!!

कैसे भी बस तुम अम्मा का
जीवन फेरो शंकर
बाँह थाम लो तुम अम्मा की
यम को घेरो शंकर

तुम्हें पता है करती कितना, मैं अम्मा से प्यार
काँप रहा है खूब कलेजा, अम्मा है बीमार !!!

आलोकेश्वर चबडाल
गिनती गाँव
कोटाबाग
उत्तराखंड । Emotional poem

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