‘‘वाह, आज तो आप सचमुच बिजली गिरा रही हैं. नई साड़ी है क्या?’’ ऋचा को देखते ही गिरीश मुसकराया.

‘‘न तो यह नई साड़ी है और न ही मेरा किसी पर बिजली गिराने का इरादा है,’’ ऋचा रूखेपन से बोली, जबकि उस ने सचमुच नई साड़ी पहनी थी.

‘‘आप को बुरा लगा हो तो माफी चाहता हूं, पर यह रंग आप पर बहुत फबता है. फिर आप की सादगी में जो आकर्षण है वह सौंदर्य प्रसाधनों से लिपेपुते चेहरों में कहां. मैं तो मां से हमेशा आप की प्रशंसा करता रहता हूं. वह तो मेरी बातें सुन कर ही आप की इतनी बड़ी प्रशंसक हो गई हैं कि आप के मातापिता से बातें करने, आप के यहां आना चाहती थीं, पर मैं ने ही मना कर दिया. सोचा, जब तक आप राजी न हो जाएं, आप के मातापिता से बात करने का क्या लाभ है.’’

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