भयंकर सूखे के बाद भयानक बाढ़ से प्रदेश अभीअभी निबटा था. सरकारी बाबुओं की चांदी हो गई थी. जीभर कर डुबकी लगाई थी राहत कार्य की गंगा में. चारों ओर खुशहाली छाई थी. अगली विपदा के इंतजार में सभी पलकपांवड़े बिछाए बैठे थे. मगर जमाने से किसी की खुशी देखी नहीं जाती.

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