सामने वाली कोठी की बालकनी में मैडम रोज सुबह नहा धो कर बाल संवारती आ खड़ी होती थीं. उनके साथ उनका प्यारा डौगी झक सफेद बालों और काली-काली आंखों वाला कभी उनकी गोद में चढ़ कर उनके गालों को चूमता तो कभी उनके कोमल मुलायम हाथों से बिस्कुट खाता नजर आता था. मैं दोनों के इस प्रणय सीन को देखने के चक्कर में सुबह छह बजे ही अपने मकान की छत पर दूरबीन लेकर चढ़ जाता था. कभी मैडम सुबह सवेरे ही नहा-धोकर बालकनी में निकल आतीं, तो कभी आने में नौ-दस भी बजा देती थीं.

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