भाग-3

सागर कपूर… एक दिलफेंक नौजवान… जो थियेटर ग्रुप की हर लड़की पर डोरे डालता घूमता था, हर नई कली को देखकर उसके पीछे लग जाता था, बीते दो सालों से एक साधारण रंग-रूप वाली लड़की सरिता शास्त्री के चक्कर में पड़ा हुआ था, यह बात उसके दोस्तों को हजम नहीं हो रही थी. मगर इसकी वजह क्या है यह सिर्फ सागर जानता था. सागर को आगे बढ़ने के लिए सरिता का सहारा चाहिए था. वह जानता था कि सरिता उससे प्यार करने लगी है. वह उसके लिए कुछ भी करेगी, कुछ भी लिखेगी. उस वक्त सागर को पब्लिसिटी की बहुत जरूरत थी और पब्लिसिटी उसे सरिता दे सकती थी. और सरिता ने दी भी. सरिता न सिर्फ अपने समाचार पत्र में, बल्कि अपने पत्रकार मित्रों के जरिए अन्य समाचार पत्रों में भी सागर के बारे में लिखवाने लगी.

सागर को सरिता से सिर्फ पब्लिसिटी ही नहीं मिल रही थी, बल्कि वह उससे कई अन्य चीजें भी सीख रहा था, मसलन बातचीत करने का प्रभावशाली तरीका, आंखों में आंखें डालकर सटीक सवाल करने का ढंग, शब्दों का सही इस्तेमाल… ये सभी चीजें उसके व्यक्तित्व में जुड़ती चली गयीं और वह निखरता चला गया.

सरिता और सागर को जब भी समय मिलता वह हाथों में हाथ डाले दूर एकान्त स्थान की ओर निकल जाते थे, जहां वह घंटों सरिता को अपने सीने से लगाए लेटा रहता, उसके लम्बे बालों को अपनी उंगलियों से सुलझाता रहता, उसके चेहरे को अपनी हथेलियों के बीच लेकर अपने चेहरे के बिल्कुल करीब ले आता… सरिता उसकी गरम-गरम सांसों को महसूस करके शरमा जाती… अपनी पलकें झुका लेती… और सागर बेचैन होकर उसके थरथराते होंठों को अपने होंठों में ले लेता.

सरिता कहती, ‘सागर, मैं हमेशा तुम्हारी बाहों में रहना चाहती हूं, ऐसे ही… मरते दम तक…’ कभी कहती, ‘सागर… वक्त से कहो न, वह यहीं थम जाए… यह लम्हा कभी खत्म न हो… सागर, मैं तुमसे बहुत प्यार करती हूं… तुम भी मुझसे इतना ही प्यार करते हो… बोलो…?’

और सागर कन्फ्यूज रहता… क्या वह सचमुच प्यार करता है? क्या वह उसके बगैर जी सकता है? क्या वह हमेशा उसके साथ रहेगा?

‘सागर… हम दोनों शादी कब करेंगे?’ उस रोज अचानक सरिता उससे पूछ बैठी.

दो पल की खामोशी के बाद सागर कुछ समझाने के अंदाज में बोला, ‘अभी मुझे बहुत कुछ करना है सरिता… बहुत ऊपर जाना है… बहुत काम करना है… शादी के बारे में बाद में सोचेंगे… अभी सिर्फ प्यार करो… ऐसे…’ उसने सरिता को कस कर अपनी बाहों में भींच लिया और सरिता मुस्कुरा दी… उसकी मीठी-मीठी बातों में बहल गयी.

धीरे-धीरे सागर ने छोटे परदे पर अपनी एक खास पहचान बना ली. वह कई धारावाहिकों में एकसाथ काम कर रहा था. अब वह उस मुकाम पर था, जहां से आगे जाने के लिए उसे सरिता की लेखनी की नहीं, बल्कि हाई सोसायटी के नामचीन लोगों से मेल-मुलाकात की जरूरत थी. उसने मुम्बई के बड़े डायरेक्टर्स-प्रोड्यूसर्स से जान-पहचान बढ़ानी शुरू कर दी. ग्लैमरस मॉडल्स के साथ वह अक्सर क्लब और होटलों में देखा जाने लगा. वह बड़ी-बड़ी फिल्मी पार्टियां और फंक्शंस अटेन्ड करने लगा. और कैमरा… शूटिंग…लाइट्स…ग्लैमर और लड़कियां… इन सबके बीच वह धीरे-धीरे सरिता से दूर होता चला गया.

सरिता उससे मिलने के लिए बेचैन रहती, उसे एक नजर देखने के लिए कई-कई दिन स्टूडियोज के चक्कर लगाती, मगर अब वह कभी-कभार उसके बहुत जिद करने पर ही उससे मिलता था. वह तड़पकर उसकी छाती से लग जाती. रो-रोकर बेहाल हो जाती, न जाने कितने प्रश्न आंसू बन कर उसकी आंखों से बहते, कंपकपाते होंठों पर कई शिकवे, कई शिकायतें होतीं, पर अब सागर के लिए यह सब कुछ बहुत उबाऊ था. कुछ ऐसा… जैसे कोई नाटक चल रहा हो, जिन्दगी एक रंगमंच हो और कोई अभिनेत्री उसके सामने करुण रस में डूबी अभिनय कर रही हो… और वह खुद अपने बेहतरीन अभिनय से उसका दिल बहला रहा हो. अब वह सरिता की किसी भावना को जज़्ब नहीं करना चाहता था. उस दिन भी वह बड़े नाटकीय अंदाज में सरिता को समझा रहा था…

‘देखो सरिता… तुम एक अच्छी लड़की हो… मेरी बहुत अच्छी दोस्त हो… मगर मेरे पीछे अपना जीवन बर्बाद मत करो… मेरे सामने लम्बा करियर पड़ा है… मैं अभी शादी की जिम्मेदारी नहीं उठा सकता… मैं तो कहूंगा कि तुम कोई अच्छा लड़का देख कर शादी कर लो…’

सरिता उसकी बात सुन कर तड़प उठी, ‘सागर… मैं तुम्हारी हूं… सिर्फ तुम्हारी…’

‘सरिता तुम समझती क्यों नहीं… मैं तुमसे शादी नहीं कर सकता… तुम मेरी अच्छी दोस्त हो… हमेशा रहोगी…’

‘तुम्हें दोस्ती की परिभाषा पता है सागर…? उसकी हद मालूम है…?’ वह अचानक गुस्से से भर उठी.

‘अरे… दोस्ती की और क्या परिभाषा होती है? हम एक-दूसरे की बातों को समझते हैं, सुख-दुख में एक-दूसरे के साथ हैं… यही तो है दोस्ती…’ वह गोलमोल तरीके से जवाब देने लगा.

‘यह परिभाषाएं तुम्हारे रंगमंच पर चलती होंगी सागर… हमारे समाज में नहीं… तुम साफ-साफ बता दो कि तुम मुझसे शादी क्यों नहीं करना चाहते… यकीन मानो मैं तुमसे प्यार करती हूं… बहुत प्यार करती हूं… मैं तुम्हारी खुशियों के आड़े कभी नहीं आऊंगी… मगर मुझसे झूठ मत बोलना… प्लीज…’

‘सरिता… सच कहूंगा तो तुम्हें बुरा लगेगा…’ सागर अब ढिठाई पर उतर आया. आज वह सोच कर आया था कि अब किस्सा खत्म करना है… यह कुछ ज्यादा ही लम्बा खिंच रहा है.

‘नहीं सागर, मैंने कभी तुम्हारी किसी बात का बुरा नहीं माना… आज सब कुछ कह दो, जो तुम्हारे दिल में है…’ सरिता ने उसके चेहरे पर अपनी नजरें जमा दीं.

‘सरिता… तुम बहुत अच्छी हो… तुमने मेरा बहुत साथ दिया… आज मैं जो कुछ भी हूं सिर्फ तुम्हारी वजह से हूं… तुम्हारी वजह से मुझे शोहरत मिली… तुमने मेरे बारे में लिखा… तुम बहुत अच्छा लिखती हो… मैं तुम्हारी बहुत इज्जत करता हूं… प्यार करता हूं, मगर…’

‘मगर क्या…?’

‘मगर मैं तुमसे शादी नहीं कर सकता… तुम… तुम बहुत साधारण हो… और मैं जिस जगह पहुंच चुका हूं वहां से मुझे और आगे जाने के लिए किसी ग्लैमरस लड़की का सहारा चाहिए… मैं शादी करूंगा तो किसी खूबसूरत मॉडल से… किसी एक्ट्रेस से… यह मेरा सपना है सरिता… और अगर तुम सचमुच मुझसे प्यार करती हो तो आज मैं तुम्हारे सामने हाथ जोड़कर कुछ मांग रहा हूं… मेरा यह सपना पूरा हो जाने दो… मेरा पीछा छोड़ दो सरिता… प्लीज…’ सागर ने हाथ जोड़ दिये.

‘ठीक है सागर… मैं सचमुच तुमसे बहुत प्यार करती हूं… और हमेशा ऐसे ही प्यार करूंगी… अंतिम सांस तक… इस प्यार के लिए तुम मुझसे जो कुर्बानी चाहोगे, दूंगी… तुम्हारा हर सपना पूरा होगा… जरूर पूरा होगा…’ सरिता ने आंसू पोछे और लौट पड़ी.

(धारावाहिक के चौथे भाग में पढ़िये कि सागर से दूर होकर सरिता ने क्या फैसला लिया… वह फिर मिले या नहीं… )

इस कहानी के पहले भाग को पढ़ने के दिए हुए लिंक पर क्लिक करें:

धारावाहिक कहानी: अभिनेता भाग-1

धारावाहिक कहानी: अभिनेता भाग 2

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