Hindi Stories: “वैदो बहन के साथ आए हैं. उन की ससुराल इसी अनुमंडल के धौरय्या थाने के तहत आने वाले एक गांव में है. वे अपनी एलिमनी के लिए कोर्टकचहरी आती रहती हैं. हां, यहां आप की पोस्टिंग के बाद पहली बार आई हैं.”
अंदर किचन के पास से 2 महिलाओं की आवाजें आ रही थीं. उस ने वैदो बहन के वैवाहिक जीवन में अनबन के चर्चे पहले भी सुने थे. 7वीं पढ़ी वे एक होशियार और जागरूक महिला थीं. रामभक्त पिता साल में चारछह महीने अयोध्या में रहते थे. पहली कन्या संतान का नाम बड़े प्यार और गर्व से रखा- वैदेही. विवाह के पहले वैदेही ही उन का सारा कामकाज देखती थी. बुआई से ले कर कटाई तक, पर्वत्योहार के सारे काम, उसी की देखरेख में होते थे. दो छोटे भाइयों की पढ़ाईलिखाई सब उन्हीं के जिम्मे थी. गांव के लोग भी उन की सूझबूझ के कायल थे.
हाथमुंह धो, सोम डाइनिंग टेबल की ओर बढ़ा. बातों में मशगूल नेहा को उस के आने का भान ही नहीं हुआ. सोम ने सुना, वैदो बहन कह रही थी, ‘छोटी, उस दिन तो मुझे लगा कि आज मैं नहीं बचूंगी. मुझे खत्म करने की उन की तैयारी पूरी थी. शाम का समय सूरज डूब चुका था लेकिन अंधेरा अभी नहीं हुआ था. मेरे पति फैक्टरी से लौटे नहीं थे. मैं अकेली थी. बंद दरवाजे के बाहर मेरी सास पहरा दे रही थी. एक खिड़की खुली थी. बाहर कुछ संदिग्ध दिखने वाले मुस्तंडे चहलकदमी कर रहे थे.’
‘तुम्हें डर नहीं लगा?’
‘डर तो लग रहा था लेकिन तभी एक टैक्सी घर के सामने आ कर रुकी और गुणेश्वर बाहर निकला.’
आगे की कहानी पढ़ने के लिए सब्सक्राइब करें
डिजिटल
सरिता सब्सक्रिप्शन से जुड़ेें और पाएं
- सरिता मैगजीन का सारा कंटेंट
- देश विदेश के राजनैतिक मुद्दे
- 7000 से ज्यादा कहानियां
- समाजिक समस्याओं पर चोट करते लेख
डिजिटल + 24 प्रिंट मैगजीन
सरिता सब्सक्रिप्शन से जुड़ेें और पाएं
- सरिता मैगजीन का सारा कंटेंट
- देश विदेश के राजनैतिक मुद्दे
- 7000 से ज्यादा कहानियां
- समाजिक समस्याओं पर चोट करते लेख
- 24 प्रिंट मैगजीन




