Friendship Satire: अशोक गौतम नमस्कार. आशा है तुम हमारी बरसों पुरानी फ्रैंडशिप को भूकंपीय झटका देने के बाद स्वस्थ व सानंद होगे. तुम्हारे स्वास्थ्य और सुखी राजनीति की मैं खुद दुखी होने के बाद भी कामना करता रहूंगा. मुझे पूरा विश्वास है कि एक न एक दिन तुम्हें मेरी फ्रैंडशिप का एहसास जरूर होगा.

माई डियर अनफ्रैंड फ्रैंड, कभी बचपन में पुरानी किताबों में पढ़ा था कि एक अच्छा फ्रैंड वह होता है जो समय पर काम आए, समय पर साथ दे. पर लगता है, नए दौर की फ्रैंडशिप में यह मुहावरा अब पुराना हो गया है. अब तो तुम से फ्रैंडशिप कर यह लग रहा है कि एक अच्छा फ्रैंड वह जो अपना काम निकाल आगे हो जाए.

माई डियर अनफ्रैंड फ्रैंड, मुझे दुख इस बात का नहीं कि तुम ने फ्रैंड होते भी मुझे अपना फ्रैंड नहीं समझा. मुझे दुख इस बात का है कि तुम ने फ्रैंड होने के बाद भी फ्रैंडशिप पर जुर्माना लगाया. पर मैं तुम्हें विश्वास दिलाता हूं कि  मैं ने तुम्हें कदमकदम पर अपना फ्रैंड नहीं, सच्चा फ्रैंड माना है. मुझे क्या पता था कि मौका मिलने पर एक दिन तुम सच्चे फ्रैंड की जगह गच्चे फ्रैंड निकलोगे?

माई डियर अनफ्रैंड फ्रैंड, फ्रैंडशिप का मतलब अधीनता नहीं होती. फ्रैंडशिप का मतलब फ्रैंड पर एकाधिकार नहीं होता. फ्रैंडशिप का मतलब एकदूसरे के प्रति समर्पण होता है, प्यार होता है. तुम पता नहीं फ्रैंडशिप की कौन सी पाटी पढ़े हो कि फ्रैंडशिप के मार्ग में जब भी चले, टेढ़ी चाल ही चले. तुम ने जब भी बंदूक चलाई, फ्रैंडों के कंधे पर रख कर ही चलाई. पर मैं चुप रहा, तुम मेरे फ्रैंड जो थे. जबकि हे माई डियर अनफ्रैंड फ्रैंड, मैं उस देश के वासी हूं जहां- अति सूधो फ्रैंडशिप का मारग है जहां नेक सयानप बांक नहीं, तहां सांचे चलें तजि आपुनपौ झुझुकै कपटी जे निसांक नहीं. ट्रंपानंद प्यारे सुजान सुनौ यहां एक ते दूसरौ आंक नहीं. तुम कौन धौं पाटी पढ़े हौ कहौ मन लेहु पै देहू छटांक नहीं.

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