Gen Z Mindset: “होते कौन हैं वे ये सब कहने वाले, हू गेव हिम राइट्स टू स्पीक अबाउट मी, हूएवर दिस पर्सन आई डोंट वांट हिम इन योर कौन्टैक्ट लिस्ट, मौम एंड नौट इन अवर होम. सच नैगेटिव पीपल्स आर कर्स टू अवर सोसाइटी.” गुस्से में तिलमिलाते हुए मैं जोरजोर से चिल्ला रही थी और मां मुझे चुप कराने की नाकाम कोशिश कर रही थी.

“रिया, काम डाउन. मुझे नहीं पता था कि वे इस तरह रिऐक्ट करंगें. अदरवाइज, मैं फोन ही पिक न करती. बट, देयर इज नो नीड औफ सो मच एंगर. उन की बातें हमें चिपक गईं क्या? या हम उन के जैसे हो गए? किसी की भी बात पर इस तरह के हाइपर रिऐक्शन की कोई जरूरत नहीं होती. सो, प्लीज, काम डाउन.” मां ने मुझे शांत करते हुए कहा.

“अरे क्या फोन पिक न करतीं, जैसे ही वे अपनी गंदी जबान से इस तरह की लैंग्वेज का इस्तेमाल कर रहे थे, आप ने क्यों नहीं उन्हें डांटा, कि आप इस तरह से कैसे बातें कर सकते हैं और वो होते कौन हैं हमारे बारे में इस तरह की बातें करने वाले. पर नहीं, आप तो बस जीजीजीजी कर रही थीं जैसे कि उन की बातें आप को बहुत पसंद आ रही हों. यू हैव टू डिस्कनैक्ट द फोन ऐट दैट टाइम. वाह्य यू वर लिस्निंग हिम?” मैं ने कहा.

“नहीं बेटा, बड़ों के लिए इस तरह की लैंग्वेज का इस्तेमाल नहीं करते. आफ्टर औल, वे रिश्ते में तुम्हारे पापा के बड़े भाई हैं. मैं ने उन्हें अपनी कौन्टैक्ट लिस्ट में ब्लौक कर दिया है. उन की बेतुकी बातों के बदले चार बातें उन्हें फोन पर सुना कर क्या मैं उन की सोच को बदल दूंगी. उन की सोच उन के साथ, हमारी सोच हमारे साथ.” मां ने फिर से अपने लौजिक देते हुए मुझे समझाने की कोशिश की.

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