महीनों से घर से दाल, सब्जियां गायब हैं. सुखचैन तो खैर उसी दिन से गायब हो गया था जिस दिन मोतीचूर का लड्डू आया था. चंद्रमुखी आजकल सूरजमुखी चल रही है. सूरजमुखी ने नाक में दम कर रखा है कि बहुत हो गया दालसब्जियों से मुंह छिपाना. अब और बहाने मत बनाओ. मर्द हो तो मर्द वाला करतब कर के दिखाओ. घर में तो बड़े मर्द बने फिरते हो. मगर जब बाजार से सब्जीदाल लाने को कहती हूं तो बाजार जाने से ऐसे डरते हो जैसे...

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