Best Hindi Story : वह अपने मातापिता का एकलौता बेटा था. 3 बहनें उस से बड़ी थीं. हम लोग उस के पड़ोस में रहते थे. उस के लालनपालन को देख कर बचपन से ही मैं उस से जलता था.

वह मुझ से 5 साल छोटा था, पर उसे वे सारी सुविधाएं मुहैया थीं, जिन की चाह अकसर हर बच्चे को होती है.

उस के पास खेलने के लिए महंगे खिलौने थे, पहनने को एक से एक मौडर्न पोशाकें थीं, पढ़ने के लिए तरहतरह की पत्रिकाएं और कहानियों की ढेरों किताबें थीं.

कम आमदनी के बावजूद भी उस के पिता उस की तमाम जायज और नाजायज जरूरतों को पूरा करने में खुशी महसूस करते थे, जिस की भरपाई बहनों से होती थी. उन की तो आम जरूरतें ही पूरी नहीं होती थीं.

वे तीनों एक जोड़ी कपड़े में साल निकाल देती थीं. पढ़नेलिखने के लिए किताबें और कौपियां भी नहीं होती थीं. लड़कियां पढ़लिख लें, इस की चिंता मांबाप को कतई नहीं थी. लड़कियां घर के कामकाज में लगी रहती थीं और मांबाप बेटे की देखभाल में.

दोनों बड़ी बहनों की पढ़ाई 5वीं-6ठी क्लास तक ही सिमट कर रह गई. उन्हें इस की कोई शिकायत नहीं थी, बल्कि उन्होंने तो छोटी उम्र से ही  झाड़ूपोंछा से ले कर चौकाबरतन तक सभी कामों में अपनेआप को ढाल लिया था, घर का सारा काम संभाल लिया था, बल्कि ऐसा करने पर उन्हें मजबूर किया गया था, क्योंकि नौकरचाकर को तो खर्च में कटौती के लिए हटाया जा चुका था. तकलीफें तो बहनों को सहनी पड़ी थीं.

लेकिन, जो सब से ज्यादा अनदेखी की शिकार हुई थी, वह थी कुहू. बस, इसी के चलते उसे बचपन से ही पढ़ाईलिखाई में बेहद दिलचस्पी थी. घर के कामकाज से उसे न कोई लगाव था और न ही कोई इच्छा थी. वह दिनभर पढ़नेलिखने में ही लगी रहती थी, जिस का खमियाजा उसे मां की डांटफटकार से भुगतना पड़ता था.

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