अंडर-17 विश्वकप फुटबौल टूर्नामैंट में भले ही सिवा मेजबानी के फख्र के कुछ और हासिल न हुआ हो लेकिन खिलाडि़यों के जुझारूपन ने भविष्य के लिए उम्मीदें जगाने में तो कामयाबी पा ही ली. मैदानी खेलों में जिस मेहनत, लगन और कमिटमैंट की जरूरत होती है वह इन नवोदित फुटबौल खिलाडि़यों में स्पष्ट देखने को मिला.

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