Lalremsiami Hmarzote: जिस इकलौते गोल ने भारतीय महिला टीम को गोल्ड मैडल दिलाया उस गोल को करना कतई आसान काम नहीं है. इसके लिए तजुर्बा, टाइमिंग और क्विक डिसीजन लेना बेहद जरुरी हैं जो लालरेमसियामी ने लिया और जीत भारत के खाते में दर्ज हो गई. यह `टोमहाक` शाट हाकी के कम ही खिलाडी मार पाते हैं. इसे रिवर्स स्टिक स्ट्राइक भी कहा जाता है.
एशियाई खेलों के महिला हाकी के भारत और चीन के बीच हुए फाइनल मेच के दसवे मिनिट में जैसे ही फॉरवर्ड प्लेयर साक्षी राणा ने चीन के सर्कल में लालरेमसियामी को पास दिया वैसे ही उन्होंने इसे गोल में तब्दील कर लिया. यह सेकेंड के सौवे हिस्से में हुआ हालाँकि इसको रूबरू देखने बहुत ज्यादा दर्शक जापान के काकमिगाराहारा स्थित कावासाकी जुको स्टेडियम में मौजूद नहीं थे. गोल होने के बाद सिर्फ हाकी के तजुर्बेकार खिलाडी ही इस टेक्निक को समझ पाए. आइये आप भी समझिए कि कैसे लालरेमसियामी ने इतिहास रचते चीन के मंसूबो पर पानी फेर दिया.
यह तो हर कोई जानता है कि हाकी के चपटे हिस्से से शाट मारे जाते हैं. नियम के मुताबिक खिलाडी स्टिक के गोल हिस्से से गेंद छू लें तो इसे फाउल माना जाता है. अब जो रिवर्स स्ट्राइक लालरेमसियामी ने खेला उसके लिए उनके पास वक्त बहुत कम था. उन्हें स्टिक को कुछ इस तरह घुमाना था कि उसका तीखा किनारा गेंद पर बिलकुल सटीक जगह पर लगे और ऐसा हुआ भी. अगर वे जरा भी चूकतीं तो फाउल हो जाता.
यह शाट खेलना इसलिए भी कठिन है कि इसे खेलने के लिए खिलाडी को मैदान की तरफ काफी नीचे कई बार तो लगभग घुटनों के बल झुकना पड़ता है. और इसी पोजीशन में गेंद को लेकर भागना पड़ता है. शाट पूरी ताकत से मारना गोल होने की दूसरी कड़ी शर्त है वह भी कुछ इस तरह कि विपक्षी गोलकीपर इसे रोक न पाए.
चीनी गोलकीपर लियू पिंग लालरेमसियामी की मंशा और मूवेंट समझ पातीं इससे पहले ही गेंद नेट के उपरी हिस्से में लगी. उसकी स्पीड इतनी ज्यादा थी कि लियू पिंग को गेंद झपकी ही नहीं. यह तो
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