Women Rights: रिलीजन का बड़ा शोर मचाया जाता है. कहा जाता है कि हमारा रिलीजन ही हमारे समाज को मैनेज करता है, हमारे समाज को भटकने से बचाता है. पर असल में यह है क्या है, यह इस बात से पता चलता है कि रेप के 90 फीसदी मामलों में जो रेपिस्ट पाए जाते हैं वे कर्मकांडी, मंदिरों में जाने वाले, तिलकधारी और धर्मवादी पार्टी के ऐक्टिव मैंबर हैं.

असल में रिलीजन का कंट्रोल एक पर ही है. वह गलत काम करने वाला नहीं, चोर नहीं, डाकू नहीं, ब्राइब लेने वाला नहीं, पैसा खा कर जजमैंट लिखने वाला नहीं, गवर्नमैंट रिकौर्ड में हेराफेरी करने वाला नहीं, इलैक्टोरल रोल्स को बिगाडऩे वाला नहीं बल्कि वह है लड़की, मासूम सी.

रिलीजन को एक इंडिपैंडेंट लड़की सब से बड़ा खतरा लगती है. उस के मुताबिक, वह रात को घर से निकले तो उसे दबोच लो. वह अपने बौयफ्रैंड के साथ घूमे तो उसे और उस के फ्रैंड की मारकुटाई कर दो. वह मनमरजी से शादी कर ले तो उसे और उस के हस्बैंड को किल कर दो.

रिलीजन तो कहता है कि हर लडक़ी की शादी 14 साल तक हो जाए और एक के बाद वह दूसरी शादी कभी न करे चाहे उस का हस्बैंड ड्रंकार्ड हो, वौयलैंट हो, अनएजूकेटेड हो, मल्टीपार्टनर्स रखता हो, रेपिस्ट हो या बेईमान हो. हिंदू रिलीजन आज भी यही राग आलाप रहा है.

जेनजी के बावजूद, सोशल मीडिया के बावजूद रिलीजन के बिजनैसमेन हजारोंकरोड़ों में खेल रहे हैं. वे करोड़ों की गाडिय़ां खरीदते हैं, अरबों के आश्रम बनवाते हैं. क्यों और कैसे?

वे यह इसलिए कर पाते हैं क्योंकि वे बड़ी पीढ़ी को, मिलेनियल को साइलैंट जेनरेशन को कनविंस कर चुके हैं कि औरतों को गुलाम बना कर रखना है. इन जेनरेशनों की औरतों में जेनजी की लड़कियों जैसा करेज नहीं है कि वे रिवौल्ट कर दें. वे किसी के मैले पैर या किसीकिसी के प्राइवेट पार्ट्स तक को छू कर अपने को महान समझती हैं. उन के मर्द जानते हैं कि ये ब्रेनवाश्ड औरतें घर में सेवा करेंगी, मार खाएंगी, भूखी रहेंगी लेकिन फिर भी बोलेंगी नहीं.

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