एक वक्त था जब खेलों में न तो सुविधाएं थीं, न खिलाड़ियों की वाहवाही होती थी और न ही ब्रैंडेड जूते होते थे. लेकिन फिर भी खिलाड़ी गोल्ड मैडल जीत कर लाते थे. पर आज सबकुछ होते हुए भी गोल्ड मैडल के लिए भारतीय हौकी टीम तरस रही है.

आखिरी बार 29 जुलाई, 1980 में मास्को ओलिंपिक में भारतीय हौकी टीम ने स्वर्ण पदक जीता था. हौकी की दुर्दशा के बारे में सभी जानते हैं. पर बुलंदियों तक कैसे पहुंचा जाए, इस पर शायद ही कोई चिंता कर रहा हो. न सरकार, न खिलाड़ी और न ही खेल पदाधिकारी. खिलाड़ी मेहनत तो करते हैं पर हर बार मात खा जाते हैं, जबकि सुविधाएं उन्हें मिल रही हैं. अब तो पैसे भी उन्हें ठीकठाक मिलने लगे हैं. बावजूद इस के, वे गोल्ड मैडल से चूक जाते हैं.

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