History of Jeans : आज जींस सिर्फ पहनने का कपड़ा नहीं रह गई है, बल्कि यह हमारी रोजमर्रा की जिंदगी का हिस्सा बन चुकी है. इसे पहन कर लोग खुद को आजाद, सहज और आत्मविश्वास से भरा हुआ महसूस करते हैं. समय, समाज या संस्कृति की कोई सीमा अब जींस को नहीं रोकती. भारतीय युवा हों या विदेशी कलाकार, सब के लिए जींस एक आरामदायक, आसान और अपनी पहचान दिखाने वाली जीवनशैली बन गई है.
अमेरिका का फैशन केवल आधुनिकता का प्रतीक नहीं, बल्कि विविधता, व्यावहारिकता और आत्मअभिव्यक्ति की खुली संस्कृति का दर्पण है. जींस, इसी संस्कृति की सब से सशक्त पहचान बन चुकी है. डैनिम वस्त्र का यह रूप आज दुनिया की हर सड़क, स्कूल, दफ्तर और समारोह में दिखता है. परंतु यह यात्रा, मजदूरों के कार्य परिधान से ले कर वैश्विक फैशन के मंच तक, बेहद दिलचस्प और संघर्षपूर्ण रही है.
जींस का जन्म 19वीं सदी के मध्य में अमेरिकी सामाजिक और औद्योगिक इतिहास से जुड़ा है. कैलिफोर्निया गोल्ड रश (1848) के दौरान, मजबूत और टिकाऊ कपड़े की जरूरत महसूस की जा रही थी. लिवाइ स्ट्रौस, एक जर्मनयहूदी व्यापारी, और दर्जी जैकब डेविस ने 1869 में डैनिम कपड़े पर कौपर रिवेट्स लगा कर पहली जींस बनाई. यह मजदूरों के लिए सस्ती, मजबूत और टिकाऊ पैंट थी. यही साधारण वस्त्र धीरेधीरे अमेरिकी मेहनतकश, स्वतंत्र आत्मा की पहचान बन गया.
20वीं सदी में हौलीवुड फिल्मों, विशेषकर वेस्टर्न्स (राज्य के काउबौय पात्रों) ने जींस को स्टाइल का प्रतीक बना दिया. 1950 के दशक में जेम्स डीन और मर्लन ब्रैंडो जैसे सितारों ने “रबेल विना काज” जैसी फिल्मों में जींस पहन कर विद्रोही युवा संस्कृति को परिभाषित किया. इस के बाद जींस केवल कामगारों का परिधान नहीं रही, बल्कि स्वतंत्रता और पहचान का सामाजिक प्रतीक बन गई.
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