पिछले कुछ समय से भारतीय कुश्ती में तेजी से नाम कमाने वाले पहलवान बजरंग पूनिया ने विश्व कुश्ती चैंपियनशिप के फ्रीस्टाइल 65 किलोग्राम भारवर्ग में सिल्वर मैडल हासिल किया है. उन्हें जापान के पहलवान ताकुटो ओटुगुरो ने फाइनल मुकाबले में 16-9 से मात दी.

हालांकि, हंगरी के बुडापेस्ट में हुई इस चैंपियनशिप में मिली इस हार के बावजूद बजरंग पूनिया एक रिकौर्ड बनाने में जरूर कामयाब रहे और वह यह कि विश्व कुश्ती चैंपियनशिप में उन का यह दूसरा मैडल है. यह कारनामा करने वाले वे पहले भारतीय खिलाड़ी बन गए हैं. उन्होंने साल 2013 में हंगरी के बुडापेस्ट में ही हुई इस चैंपियनशिप के 60 किलोग्राम भारवर्ग में ब्रौन्ज मैडल जीता था.

वैसे, इस से पहले साल 2010 में भारत के स्टार पहलवान सुशील कुमार ने रूस के मास्को शहर में हुई विश्व कुश्ती चैंपियनशिप में 66 किलोग्राम भारवर्ग में गोल्ड मैडल जीता था.

बेहतरीन रहा है यह साल

साल 2012 के लंदन ओलिंपिक में ब्रौन्ज मैडल जीतने वाले पहलवान योगेश्वर दत्त के प्रिय शिष्य बजरंग पूनिया के लिए अब तक यह साल जबरदस्त रहा है. उन्होंने इस साल औस्ट्रेलिया के गोल्ड कोस्ट में हुए 21वें कौमनवेल्थ खेलों और इंडोनेशिया के जकार्ता में हुए 18वें एशियाई खेलों में गोल्ड मैडल हासिल किया था. इन्हीं कुछ उपलब्धियों की वजह से बजरंग पूनिया को इस विश्व कुश्ती चैंपियनशिप में तीसरे नंबर की वरीयता दी गई थी जिसे उन्होंने सिल्वर मैडल जीत कर सही साबित कर दिखाया.

फाइनल में शुरुआत नहीं रही सही

हंगरी के बुडापेस्ट में हुए फाइनल मुकाबले में 24 वर्षीय भारतीय पहलवान बजरंग पूनिया शुरुआत में ही थोड़े दबाव में आ गए थे. जापानी पहलवान ने 5 पौइंट ले कर उन्हें मानसिक तनाव में ला दिया था पर इस के बाद बजरंग ने पलटवार किया और 2-2 पौइंट ले कर स्कोर 4-5 कर दिया. इस के बाद ताकुटो ओटुगुरा ने 2 पौइंट और लिए, जिस से उन के पास 3 पौइंट की बढ़त हो गई. हालांकि, बजरंग ने जबरदस्त टक्कर देते हुए 2 पौइंट और बनाए और स्कोर 6-7 कर दिया.

ब्रेक के बाद जब मुकाबला शुरू हुआ तो बजरंग पूनिया अपने ही एक दांव में उलझ गए और विपक्षी पहलवान ने 4 पौइंट ले कर 10-6 की बढ़त बना ली.

बजरंग ने वापसी के लिए पूरा जोर लगाया, लेकिन उन्हें कामयाबी नहीं मिल सकी और जापानी पहलवान ने यह मुकाबला 16-9 से अपने नाम करते हुए गोल्ड मैंडल जीत लिया.

इस से पहले बजरंग पूनिया ने सेमीफाइनल मुकाबले में क्यूबा के एलेंजांड्रो वाल्देस तोबिएर को 4-2 से मात दी थी. दूसरी ओर, जापानी खिलाड़ी ने सेमीफाइनल मुकाबले में रूस के पहलवान अखमेद चाकाऐव को 15-10 से हराया था.

खराब रेफ्रीशिप का शिकार

‘अर्जुन अवार्ड’ विजेता कुश्ती कोच कृपाशंकर बिश्नोई बजरंग पूनिया की हार को खराब रेफ्रीशिप का शिकार मानते हैं. उन्होंने बताया, “मेरे मुताबिक जापानी पहलवान कुश्ती नहीं खेल रहा था, वह तो कबड्डी खेल रहा था. वह कभी मनमुताबिक निष्क्रियता क्षेत्र में रह कर विश्राम करने लग जाता तो कभी झूठी चोट का बहाना कर अपना दम ठीक करने लग जाता.

“यूनाइटेड वर्ल्ड रेसलिंग के डाक्टर ने भी जापानी पहलवान की चोट को बेवजह का बहाना बताया और उसे कुश्ती करने की हिदायत दी. रेफरी द्वारा नकारात्मक कुश्ती खेलने वाले खिलाड़ी को बढ़ावा दिया गया, यह देख कर मै हैरान हूं. ऐसे में कौशन (caution) का नियम होता है जो रेफरी की तरफ से दिया नहीं गया. बाद मे 2 कौशन जरूर दिए गए पर पहले का एक कौशन नहीं दिया गया. नियमानुसार तीसरा कौशन मिलने पर कुश्ती खत्म मान ली जाती है. ऐसे पहलवान को डिसक्वालिफाई करने का प्रावधान है.

“रेफरी संरक्षण मे जापानी पहलवान कुश्ती के दौरान लगातार पैसिविटी जोन में खेल रहा था जो एक अपराध था. भारतीय कुश्ती संघ के माध्यम से मैं यूनाइटेड वर्ल्ड रेसलिंग से आग्रह करता हूं कि ऐसे अपराधी रेफरी टिम को सजा दी जाए जिस में उस की कैटेगिरी डाउन करने का प्रावधान शामिल है.”

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