सुसाइड-आखिर क्यों जीना नहीं चाहती नई पीढ़ी

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आत्महत्या व्यक्ति के जीवन में दर्द, तनाव और अवसाद के चरम पर पहुंचने का सूचक है. आत्महत्याओं के कारण और तरीके भले अलग-अलग हों, लेकिन इसमें कोई दो राय नहीं कि जब परिवार, समाज और देश की व्यवस्था से सहारे की हर उम्मीद खत्म हो जाती है, तभी कोई व्यक्ति इस आखिरी रास्ते को चुनता है। तो क्या विकास की चकाचौंध और आगे बढ़ने की अंधी प्रतिस्पर्धा के बीच हमारे परिवार, समाज और शासन में नयी पीढ़ी को सहारा देने की शक्ति क्षीण हो रही है? क्या यह सच नहीं है कि हमारी सामाजिक मान्यताएं, सामाजिक स्तर, सामाजिक अपेक्षाएं हमारे जीवन को ऐसे बंधन में जकड़े हुए हैं, जो कभी-कभी फांसी का फंदा बन जाता है?

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