हम अपने आसपड़ोस में नज़र दौड़ाएं तो पाएंगे कि कितने ही लोग हैं जिन्होंने किसी ना किसी कारणवश अपने जीवनसाथी का साथ छूटने के बाद दूसरी शादी या तीसरी शादी की है. बहुतेरे ऐसे भी मिलेंगे जो पहले साथी की जुदाई के बाद से अभी तक अकेले हैं और दूसरी शादी की उन्हें कोई चाह भी नहीं है. बहुतेरे ऐसे लोग भी हैं जो दूसरी शादी करना तो चाहते हैं, लेकिन पहली शादी के कड़ुवे अनुभवों के चलते आशंकित हैं और हिम्मत नहीं जुटा पा रहे हैं. बहुत से लोग ऐसे हैं जिनके पास पहली शादी से बच्चे हैं और इस कारण वो पुनः शादी की चाह रखते हुए भी अकेले जिए जा रहे हैं. इसके अलावा भी तमाम वजहें हैं जो मध्यमवर्गीय लोगों को दूसरी शादी से डराती हैं. लोग क्या कहेंगे? फिर वही झगड़े-झमेले होने लगे तो क्या होगा? आर्थिक निर्भरता, स्वतन्त्रता, धर्म की बंदिशें बहुतेरे कारण हैं जो इंसान को दूसरी शादी से रोकते हैं. खासकर महिलाओं को.

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