भारत के ग्राउंडवाटर (भूमिगत जल) संसाधनों का आवश्यकता से अधिक प्रयोग किया जा रहा है, जो खतरे की घंटी है. विशेषज्ञ अब काफी समय से इस बारे में चेतावनी देते आ रहे हैं. 2011 के सैंपल मूल्यांकन के अनुसार भारत के 71 जिलों में से 19 (लगभग 26 प्रतिशत) में ग्राउंडवाटर की स्थिति गंभीर या शोषित है, जिसका अर्थ यह है कि उनके जलाशयों की जो प्राकृतिक रिचार्ज क्षमता है उसके बराबर या उससे अधिक पानी उनसे निकाला जा रहा है. 2013 के एक अन्य मूल्यांकन के अनुसार यह प्रतिशत बढ़कर 31 हो गया है, इस मूल्यांकन में उन जिलों के ग्राउंडवाटर ब्लॉक्स को भी शामिल किया गया जो खारे (सेलाइन) हो गये थे.

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