पंचकूला और सिरसा सहित दीगर इलाकों में बाबा राम रहीम के चेलों ने जो कहर ढाया, उसका कुछ हिस्सा रिपोर्टरों ने कथित तौर पर जान पर खेल कर दिखाया, उसके लिए वे साधुवाद के पात्र होते बशर्ते ऐसे बाबाओं को हीरो बनाने में मीडिया का कोई योगदान न होता. हरेक न्यूज चैनल ने दावा किया कि उसके कैमरामैन और रिपोर्टर ने जिंदगी की परवाह न करते हुये हिंसा का नंगा नाच और तांडव दर्शकों तक पहुंचाया.

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