Internet and Poverty: 14 जून के आसपास स्टारलिंक और टेस्ला के मालिक दुनिया के पहले ट्रिलियनर बन गए थे. भारत के 145 करोड़ लोग दिनरात मेहनत कर के पूरे साल में जितना कमाते हैं उस का एकतिहाई एलन मस्क के पास अकेले कमाते है. यह अमीरी की जहालत की इंतहा है. बाद में टेस्ला और स्टारङ्क्षलक के शेयरों के दाम गिरने के बाद एलन मस्र्क की पूंजी एक चौथाई कम हो गई पर अभी भी वे बहुत अमीरों में से हैं जुलाई माह में उन्हें 750 अरब डौलर का नुकसान हुआ.

अमीर और गरीब के बीच की खाई तो हमेशा से थी. जब से इंसान के अंदर इकट्ठा करने की मानसिकता ने जन्म लिया तभी से संसाधनों को इकट्ठा करने की होड़ शुरू हुई और इस होड़ में सभी दौडऩे लगे. जो इस दौड़ में फिसड्डी रहा वह गरीब हुआ और जो इस रेस में आगे रहा वह अमीर कहलाया. आज भी यह दौड़ जारी है लेकिन हालात बदल गए हैं. आज अमीर जिस रफ्तार से अमीर होता जा रहा है, गरीब उसी रफ्तार से और गरीब होता जा रहा है. खाई लगातार बढ़ रही है.

आज स्थिति यह है कि दुनिया की एक प्रतिशत आबादी ने दुनियाभर की आमदनी का करीब 20 फीसदी हिस्सा हथिया रखा है. ऐसा क्यों हो रहा है? क्या अमीर और गरीब की इस खाई को बढ़ाने के पीछे गरीबों की कामचोरी है या अमीरों की साजिश? आइए जानते हैं. इसी खाई में एक और खाई हैं औरतों की. अमीरों की औरतें भी निचली खाई पर हैं जबकि बहुत नीचे की खाई में गरीबों की बस्ती की औरतें.

आगे की कहानी पढ़ने के लिए सब्सक्राइब करें

डिजिटल

(1 साल)
USD99USD49
 
सब्सक्राइब करें

सरिता सब्सक्रिप्शन से जुड़ेें और पाएं

  • सरिता मैगजीन का सारा कंटेंट
  • देश विदेश के राजनैतिक मुद्दे
  • 7000 से ज्यादा कहानियां
  • समाजिक समस्याओं पर चोट करते लेख
 

डिजिटल + 24 प्रिंट मैगजीन

(1 साल)
USD150USD129
 
सब्सक्राइब करें

सरिता सब्सक्रिप्शन से जुड़ेें और पाएं

  • सरिता मैगजीन का सारा कंटेंट
  • देश विदेश के राजनैतिक मुद्दे
  • 7000 से ज्यादा कहानियां
  • समाजिक समस्याओं पर चोट करते लेख
  • 24 प्रिंट मैगजीन
और कहानियां पढ़ने के लिए क्लिक करें...