Social Media Addiction : सोशल मीडिया पर लोग लाइक व शेयर की भीख मांग रहे हैं. एलीट सेक्शन के पास दिखाने के लिए क्रिएटिविटी है तो यह भीख ढक-छिप जा रही है मगर गरीब बिना क्रिएटिविटी के इस दलदल में अपने मूल मुद्दों से भटक रहा है. जानिए क्यों रची जा रही यह साजिश.
सोशल मीडिया धीरेधीरे लोगों से सैन्स औफ क्वेश्चनिंग की प्रवृत्ति खत्म करती जा रही है. खासकर गरीब अपनी समस्याओं के समाधान सोशल मीडिया में खोजने लगे हैं और अपनी सफलता व असफलता के लिए सोशल मीडिया पर निर्भर होने लगे हैं.
एक समय था जब गरीब से गरीब अपनी परिस्थिति के लिए जिम्मेदार देश के लचर सिस्टम को मानता था. वह इतना तो सोचता ही था कि चूंकि सिस्टम को चलाने वाले ईमानदार नहीं हैं इसलिए देश और उन की यह हालत है. इस से होता-जाता भले कुछ न था मगर सरकारों में बैठे नेताओं को इन के सामने झठमूठ का ही सही झकना जरूर पड़ता था.
जल्दी अमीर बनने की जुगत
आज के टैक जायंट्स के बनाए एप्लीकेशन और उन से जल्द अमीर बन जाने की उम्मीद उन्हें ऐसी दुनिया में धकेल रही है जहां सिवा माथा पीटने के और कुछ नहीं है. गरीब से गरीब आज इन्फ्लुएंसर बनने की होड़ में फंस चुका है. अधिकतर को यह लगने लगा है कि सोशल मीडिया बहुत जल्दी और आसान जरिया है अमीर और सफल बनने का. इस के लिए सब से निचले पायदान वाला व्यक्ति भी हर संभव कोशिश/हरकतें कर रहा है जिस से उस के जीवन में सुधार आ सके.
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