Second Marriage : दूसरी शादी में समाज और रिश्तेदारों की भूमिका अहम होती है. सामाजिक सुरक्षा की नजर से उस शादी को सफल बनाने में ये लोग मदद कर सकते हैं. इन के साथ होने से भावनात्मक सुरक्षा और सहयोग मिलने लगता है. सवाल यह कि समन्वय कैसे बने.
पहले पति या पत्नी के जिंदा न रहने पर या फिर पतिपत्नी का आपस में कानूनन तलाक हो जाने के बाद दूसरी शादी की जा सकती है. दूसरी शादी में सब से बड़ी परेशानी सामाजिक मान्यता और घरपरिवार के सहयोग को ले कर होती है. ऐसे में प्रयास यह होना चाहिए कि घर, परिवार, समाज और नातेरिश्तेदार भी इस को सहज भाव से लें. यह जिम्मेदारी दूसरी शादी करने वाले पतिपत्नी को लेनी चाहिए. पतिपत्नी अपने अच्छे व्यवहार और आपसी मेलजोल से घर, परिवार और नातेरिश्तेदारों का दिल जीत सकते हैं. एक बार सहज भाव बन जाता है तो दूसरी शादी में होने वाली बाद की दिक्कतें कम हो जाती हैं.
दूसरी शादी में समाज और रिश्तेदारों की भूमिका अहम होती है. सामाजिक सुरक्षा की नजर से उस शादी को सफल बनाने में ये लोग मदद कर सकते हैं. इन के साथ होने से भावनात्मक सुरक्षा और सहयोग मिलने लगता है. समाज और रिश्तेदारों के साथ होने से शादी करने वाले जोड़े को यह एहसास नहीं होता कि वे अकेले हैं. यह बात भी है कि कुछ मामलों में रिश्तेदार नकारात्मक भूमिका भी निभा सकते हैं. कई बार अलगअलग कारणों से ये लोग नई शादी को स्वीकार करने को सहज भाव से तैयार नहीं होते. इन को तैयार करने का काम पतिपत्नी को करना चाहिए.
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