Modern Relationships: कौर्पोरेट कल्चर सिर्फ लड़कों की बपौती नहीं है. इस पर लड़कियों का भी बराबर का हक होना चाहिए. लड़कियों को दोस्ती, प्यार और सैक्स के मामले में अपनी मरजी से जीने का पूरा हक होना चाहिए क्योंकि आजादी बिना जिंदगी अधूरी है. जो लड़की अपनी मेहनत और स्ट्रगल से औफिस में अपना कैरियर खुद तय कर रही है वह प्यार भी करे, दोस्ती भी निभाए और सैक्स का फैसला भी खुद ले.

आ जकल कौर्पोरेट कल्चर में इश्क होना सामान्य सी बात है. यहां इश्क भी होते हैं और रिलेशनशिप भी बनते हैं. कौर्पोरेट कल्चर में कई रिश्ते दोस्ती के रूप में लंबे वक्त तक चलते हैं, कई रिश्ते दोस्ती से शुरू हो कर प्यार और फिर शादी तक पहुंचते हैं तो कई रिश्ते सिर्फ सैक्स तक ही सीमित रहते हैं. कौर्पोरेट कल्चर असल में लड़कियों की आजादी का नया अध्याय है लेकिन कई बार लड़कियों को इस आजादी की कीमत चुकानी पड़ती है.

आजकल कौर्पोरेट दुनिया लड़कियों की आजादी का नया अध्याय बन गई है. घर की चारदीवारों में बंधी लड़कियों की जिंदगी अब औफिस, मीटिंग्स, प्रोजैक्ट्स और कैरियर के साथ बदल रही है. कौर्पोरेट कल्चर ने लड़कियों को आर्थिक आजादी, आत्मविश्वास और फैसले लेने की ताकत दी है लेकिन कई बार लड़कियों को इस आजादी की कीमत भी चुकानी पड़ती है. काम का तनाव, घर व औफिस का दोहरा बोझ, यौन उत्पीड़न और वेतन में भेदभाव आदि सब लड़कियां झेलती हैं, फिर भी यह सच है कि वर्क कल्चर ने लड़कियों की जिंदगी बदली हैं. कौर्पोरेट जौब्स ने लड़कियों को घर से बाहर निकाल कर उन्हें आर्थिक रूप से मजबूत बनाया है.

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