Motivational Poem: कह सकी न बात अब तक, खुद से कहना चाहती हूं
अव्यक्त जो कब से रहा, अब व्यक्त करना चाहती हूं !!
एक रीत थी तो बंध गई मैं, आवाज़ दी तो थम गई मैं
अब तोड़ बंध मजबूरियों के, आज बहना चाहती हूं !!
घर संवारा-जग संभाला, खुद का मन पढ़ न सकी मैं
काश रो सकती मैं जी भर,कितना बिखरना चाहती हूं !!
अपने उजाले पास रख लो, अपने सहारे साथ रख लो
अब अंधेरी राह में भी, बस अकेले ही चलना चाहती हूं !!
कितना कहा-किसको सुना, कितना सहा-किसको पता ?
बेख़ौफ़ जिससे कह सकूं सब, वो साथी बनाना चाहती हूं !!
मांगी दुआ सबके लिए, धूप बारिश हवा सब सलामत रहे
अबकी प्रार्थनाओं में अपनी, खुद को भी कहना चाहती हूं !!
एक साज जो धूमिल पड़ा था, काम जो अधूरा रहा था
आज वरियताओं के आज सारे, क्रम बदलना चाहती हूं !! Motivational Poem
लेखिका - नमिता गुप्ता "मनसी"
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