स्त्रीत्व को परिभाषित करने के लिए शब्द काफी नहीं हो सकते. स्त्री होना तो खुद में एक अनोखा अनुभव है जिस का सिर्फ एहसास ही किया जा सकता है. पुरुष ने हमेशा से ही स्त्री को कमजोर के रूप में ही चित्रित किया है. एक मजबूत शरीर और भारी आवाज वाली स्त्री में वे सौंदर्य बोध नहीं देख पाते. पर, यह बात पूरी तरह पूर्वाग्रह से ग्रस्त दिखती है.

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