अफसोस की बात है कि तार्किकता को तरजीह दे कर सत्ता से सवाल करने वाले छात्रों को देशद्रोही घोषित किया जा रहा है. देखा जाए तो यह देश की सामूहिक बौद्धिकता पर घातक हमला है. ऐसा लगता है छात्रों को सुनियोजित तरीके से उलझा कर शिक्षा का व्यवसायीकरण कर छात्रों के भविष्य से खिलवाड़ किया जा रहा है.

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