राजूराम नायक एटीएम में रुपए डालने वाली एक कंपनी में काम करता था. इसलिए वह कैशवैन की सुरक्षा से संबंधित खामियों को जानता था. इसी का फायदा उठाते हुए उस ने एक दिन अपने साथियों के साथ कैश वैन से 74 लाख रुपए बड़ी आसानी से लूट लिए. काफी कोशिश के बाद पुलिस फेसबुक से लुटेरों तक पहुंच ही गई. फिर…  —

राजस्थान में नागौर जिले का एक शहर है मकराना. मकराना का मार्बल पत्थर पूरे भारत में प्रसिद्ध है. देश की कई ऐतिहासिक

और प्राचीन इमारतों में मकराना का पत्थर लगा हुआ है. मकराना के पास ही बोरावड़ कस्बा है.

बीती 22 अप्रैल की बात है. विभिन्न बैंकों के एटीएम में पैसे डालने वाली वैन दोपहर करीब 3 बज कर 50 मिनट पर बोरावड़ पहुंची. वैन में सवार लोगों ने पीएनबी के एटीएम में 18 लाख रुपए डाले. इस के बाद वैन परबतसर व बडू के एटीएम में रुपए डालने के लिए रवाना हो गई.

वैन मकराना का रहने वाला रमेश चला रहा था. वैन में पलाड़ा निवासी गार्ड प्रताप सिंह के साथ 2 अन्य कर्मचारी करतारपुरा निवासी कस्टोडियन संजू सिंह और मकराना निवासी कमल किशोर माथुर भी सवार थे. गार्ड प्रताप सिंह के पास बंदूक थी. सीएमसी इंफो सिस्टम प्राइवेट लिमिटेड कंपनी की इस वैन से मकराना बोरावड़ परबतसर आदि इलाकों में एसबीआई, पीएनबी, बैंक औफ बड़ौदा, आईसीआईसीआई बैंक और ओरियंटल बैंक औफ कौमर्स के एटीएम में रुपए डाले जाते थे.

वैन बोरावड़ से आधा किलोमीटर दूर छापर बस्ती के पास बिदियाद रोड पर पहुंची थी. चालक रमेश अपनी धुन में वैन चला रहा था. वैन में सवार गार्ड प्रताप सिंह और 2 अन्य कर्मचारी आपस में बातें कर रहे थे. तभी पीछे से एक जीप ने हौर्न बजाया.

हौर्न सुन कर रमेश ने पीछे आ रही जीप को साइड दे दी. पीछे से आई जीप ने बराबर में आते ही वैन को टक्कर मार दी. टक्कर से वैन का संतुलन बिगड़ गया. वैन पास की एक दीवार से जा टकराई.

चालक रमेश और वैन में बैठे तीनों लोग कुछ समझ पाते, इस से पहले ही जीप चालक ने अपनी गाड़ी पीछे ले कर वैन में फिर टक्कर मारी. इस के तुरंत बाद जीप से 6 लोग नीचे उतरे और वैन को चारों तरफ से घेर लिया. सभी लोगों के चेहरे ढके हुए थे.

नकाबपोश बदमाशों ने पिस्तौल दिखा कर वैन चालक रमेश, गार्ड प्रताप सिंह और दोनों कर्मचारियों को धमकाया और उन से मारपीट की. फिर उन्होंने सब से पहले गार्ड प्रताप सिंह की 12 बोर की बंदूक छीनी. एक बदमाश ने चालक रमेश से वैन की चाबी छीन ली.

इस के बाद बदमाशों ने वैन में सवार चारों लोगों के मोबाइल फोन ले लिए और उन्हें दीवार की तरफ मुंह कर के घुटनों के बल बैठा दिया. इस के बाद बदमाशों ने वैन में लोहे की जंजीरों से बंधे रुपयों से भरे बक्से की जंजीर और ताला तोड़ दिया. बक्से को अपनी जीप में रख कर बदमाश भाग गए. उस बक्से में करीब 74 लाख रुपए थे.

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इस वारदात में मुश्किल से 5-7 मिनट लगे. उस वक्त शाम के करीब 4:20 का समय था. अचानक हुई इस वारदात से वैन में सवार चारों लोग सकते में आ गए. वैन में रुपए लाना, ले जाना और बैंकों के एटीएम में रुपए डालना उन का रोजाना का काम था.

इस इलाके में पहले इस तरह की कोई वारदात भी नहीं हुई थी. सुरक्षा के तौर पर वैन के साथ बंदूकधारी गार्ड भी चलता था, लेकिन बदमाशों ने गार्ड की बंदूक छीन कर बचाव का मौका ही नहीं दिया था.

बदमाश रुपयों से भरे बक्से के साथ वैन में सवार चारों लोगों के मोबाइल भी ले गए थे. एक कर्मचारी के पास 2 मोबाइल थे, इसलिए उस का एक मोबाइल बच गया था. लुटेपिटे कर्मचारियों ने पहले अपनी कंपनी में और इस के बाद पुलिस को सूचना दी.

सूचना मिलने पर मकराना थाना पुलिस मौके पर पहुंची. वैन कर्मचारियों से 74 लाख रुपए लूटे जाने की बात सुन कर हड़कंप मच गया. तुरंत पुलिस अधिकारियों को सूचना दे कर पूरे नागौर जिले के अलावा आसपास के इलाकों में नाकेबंदी करा दी गई.

मकराना थानाप्रभारी जितेंद्र सिंह चारण और पुलिस उपाधीक्षक सुरेश कुमार सांवरिया ने मौका मुआयना करने के बाद वैन में सवार चारों लोगों को थाने ले जा कर पूछताछ की.

पूछताछ में पता चला कि एटीएम में पैसे डालने के लिए उन्होंने उसी दिन दोपहर में मकराना स्थित स्टेट बैंक औफ इंडिया की चेस्ट ब्रांच से 84 लाख रुपए निकलवाए थे.

इस के बाद उन्होंने मकराना में जयशिव चौक स्थित एसबीआई के एटीएम में 16 लाख रुपए डाले थे. फिर मकराना-बोरावड़ बाइपास पर पैट्रोलपंप के एटीएम में पैसा डालने पहुंचे. इस एटीएम का लौक खराब था, जबकि उस में रुपए भरे थे. वैन में सवार कर्मचारियों ने सुरक्षा के नजरिए से इस एटीएम में रखे 23 लाख 71 हजार 800 रुपए निकाल लिए.

बाद में उन्होंने बोरावड़ में पीएनबी के एटीएम में 18 लाख रुपए डाले. बोरावड़ से जब ये लोग परबतसर व बडू के एटीएम में रुपए डालने के लिए जा रहे थे, तभी रास्ते में लूट की वारदात हो गई. लूट की वारदात के समय वैन में 73 लाख 71 हजार 800 रुपए थे.

लूट की इस वारदात में पुलिस को सब से पहले वैन में सुरक्षा की सब से बड़ी कमी नजर आई. आमतौर पर नोटों को लाने ले जाने के लिए बख्तरबंद गाडि़यों का उपयोग किया जाता है. इस के अलावा सुरक्षा के पुख्ता इंतजाम भी होते हैं.

लेकिन इस इलाके में एटीएम में रुपए डालने वाली कंपनी सीएमसी इंफो सिस्टम प्राइवेट लिमिटेड ने सुरक्षा के मानकों का ध्यान नहीं रखा था. कर्मचारियों ने बताया कि वे हमेशा इसी वैन से रुपए डालने का काम करते हैं.

बदमाशों ने इतनी बड़ी रकम लूटी थी, लेकिन उन्होंने न तो वैन के कर्मचारियों से कोई खास मारपीट की और न ही कोई गोली चलाई. दिनदहाड़े हुई इस वारदात पर पुलिस को कई तरह के संदेह भी हुए.

संदेह इस बात का भी था कि जीप के टक्कर मारते ही गार्ड ने अलर्ट हो कर गोली क्यों नहीं चलाई? एक कारण यह भी था कि चारों कर्मचारियों ने लुटेरों का किसी तरह का कोई विरोध क्यों नहीं किया? लूट का शिकार हुए 3 कर्मचारी मकराना के रहने वाले थे, इस से भी पुलिस को कई तरह के संदेह हुए.

एसपी डा. गगनदीप सिंगला ने भी घटनास्थल पर जा कर मौकामुआयना किया. उन्होंने एफएसएल की टीम बुला ली थी. एसपी सिंगला ने लूट के इस मामले को गंभीरता से लिया और हरसंभव नजरिए से जांच करने और बदमाशों का पता लगाने के लिए 5 टीमों का गठन कर दिया. इन टीमों की जिम्मेदारी पुलिस उपाधीक्षक सुरेश सांवरिया, मकराना थानाप्रभारी जितेंद्र सिंह, एसआई दिलीप सहल, कुचेर और परबतसर के थानाप्रभारियों को सौंपी गई.

पुलिस की एक टीम ने चारों कर्मचारियों से अलगअलग पूछताछ की. इस के साथ ही उन की बताई बातों की पुष्टि भी की. कर्मचारियों की बातों में कोई विरोधाभास नजर नहीं आया.

लुटेरों की तलाश में जुटी पुलिस को वारदात के कुछ घंटे बाद ही रात को सबलपुर रोड पर वह बक्सा मिल गया, जिसे बदमाश वैन से लूट कर ले गए थे. बक्सा खाली था. जिस जगह यह बक्सा मिला, वह जगह वारदात वाली जगह से करीब 5 किलोमीटर दूर थी.

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दूसरे दिन 23 अप्रैल को पुलिस ने चारों कर्मचारियों को बुला कर फिर अलगअलग पूछताछ की ताकि लुटेरों का कोई सुराग मिल सके. लेकिन ऐसा कोई सुराग नहीं मिला.

पुलिस ने बोरावड़ से ले कर घटनास्थल तक के रास्ते में लगे सीसीटीवी कैमरों के फुटेज भी खंगाले. एडीशनल एसपी नीतेश आर्य ने एटीएम में रुपए डालने वाली कंपनी के अधिकारियों से पूछताछ की.

पुलिस को इस कंपनी की लापरवाही साफ नजर आ रही थी. कंपनी ने वाणिज्यिक बख्तरबंद गाड़ी के बजाय एक साधारण निजी वैन को मोटी रकम के परिवहन के काम में लगा दिया था. नियमानुसार कैश वैन में 2 हथियारबंद सिक्योरिटी गार्ड और एक वाहन चालक के साथ 2 एटीएम अधिकारी होने चाहिए.

इन में एक सशस्त्र गार्ड को चालक के साथ आगे की सीट पर बैठना होता है, जबकि दूसरा गार्ड पीछे बैठता है. कैश वैन में जीपीएस निगरानी उपकरण और सुरक्षा अलार्म भी होना चाहिए, जो लूटी गई वैन में नहीं था.

तीसरे दिन भी एसपी और एडीशनल एसपी के साथ तमाम पुलिस अफसर जांचपड़ताल में जुटे रहे, लेकिन लुटेरों का कोई सुराग नहीं मिला. बदमाशों का पता लगाने के लिए पुलिस ने एटीएम में रुपए डालने वाली कंपनी के हाल ही नौकरी छोड़ने वाले कर्मचारियों से भी पूछताछ की.

साथ ही उन के पुराने रिकौर्ड की जानकारी भी जुटाई गई. आसपास के इलाके के बदमाशों और कुछ संदिग्ध लोगों से भी पूछताछ की गई. पुलिस ने कई जगह दबिश भी दी.

इस दौरान पुलिस ने 100 से ज्यादा सीसीटीवी के फुटेज खंगाले. इन में वैन के साथ बाइक पर 2 युवक लगातार आगेपीछे चलते हुए नजर आए. बाइक चला रहे युवक ने सफेद और पीछे बैठे युवक ने नीली चैक वाली शर्ट पहन रखी थी. बाइक चालक कलाई में कड़ा पहने हुए था. ये फुटेज लूट के शिकार कर्मचारियों को दिखाए, तो उन्होंने इन की लुटेरों के साथ होने की पुष्टि की.

बाइक स्पलेंडर थी, लेकिन मोडिफाई कर के पीछे से उसे एनफील्ड जैसा लुक दिया गया था. इस के बाद पुलिस ने करीब 3 हजार मोटरसाइकिलों का भौतिक सत्यापन कर इस इलाके के बाइक मैकेनिकों से जानकारी जुटाई.

एक मैकेनिक से इस बाइक के मालिक के बारे में सुराग मिले. बाइक मालिक की फेसबुक खंगाली तो उस की पहचान मोरेड़ निवासी मनोज पादरा के रूप में हुई. सीसीटीवी फुटेज में मनोज ने जो शर्ट पहन रखी थी, उसी शर्ट में उस की फोटो फेसबुक पर लगी थी. पुलिस ने मनोज पादरा का पता लगा कर उसे पकड़ लिया.

इस के बाद कड़ी से कड़ी जुड़ती गई. पुलिस को कुछ बदमाशों के नामपते पता चल गए. उन के मोबाइल की काल डिटेल्स और लोकेशन निकाली गई. इस के बाद लूट के तार नागौर जिले से अलवर तक जुड़ गए. पता चला कि लूट करने वाले गिरोह का सरगना अलवर के बानसूर का रहने वाला महिपाल यादव था. वारदात में बानसूर और मकराना के युवक शामिल थे.

नागौर के मकराना शहर से कुचेरा थानाप्रभारी देवीलाल के नेतृत्व में एक टीम अलवर जिले के बानसूर इलाके में भेजी गई. बानसूर में पता चला कि महिपाल और उस के कुछ साथी लूट की रकम का बंटवारा करने के लिए सीकर जिले के कस्बा नीमकाथाना गए हैं.

27 अप्रैल को कुचेरा थानाप्रभारी ने नीमकाथाना पुलिस को सूचित कर नाकेबंदी कराई. महावा गांव के पास पुलिस को देख कर विक्रम और अनिल यादव बाइक पर सवार हो कर भाग गए. विक्रम और अनिल दोनों ही बानसूर के रहने वाले थे. महिपाल यादव रुपयों से भरा बैग फेंक कर जंगल की ओर भाग निकला था.

नीमकाथाना सदर पुलिस और कुचेरा पुलिस थानाप्रभारी ने महिपाल का पीछा किया तो वह पहाड़ पर चढ़ गया. कुचेरा थानाप्रभारी देवीलाल, उन का गनमैन कजोड़मल और ड्राइवर महेश भी पहाड़ पर चढ़ गए. देवीलाल ने महिपाल को दबोच लिया तो उस ने उन के हाथ को दांतों से चबा लिया. इस से पकड़ छूटने पर महिपाल पहाड़ से उतर कर जंगल के नालों में भागने लगा. बाद में पुलिस ने घेराबंदी कर उसे पकड़ लिया.

महिपाल यादव ने जो बैग फेंक दिया था, उसे नीमकाथाना पुलिस थाने ले आई. वहां रकम की गिनती की गई तो बैग में करीब 30 लाख रुपए निकले. महिपाल की निशानदेही पर पुलिस ने बानसूर स्थित उस के घर से वारदात में इस्तेमाल की गई मेजर जीप व वैन के गार्ड प्रताप सिंह से लूटी गई बंदूक बरामद कर ली.

पुलिस दल महिपाल को मकराना ले आया. मकराना पुलिस ने महिपाल से पूछताछ के बाद उस के 8 अन्य साथियों को गिरफ्तार कर लिया. नागौर एसपी डा. गगनदीप सिंगला ने 28 अप्रैल को प्रैस कौन्फ्रैंस कर लूट की वारदात का खुलासा किया.

आरोपियों से पूछताछ में लूट की जो कहानी उभर कर सामने आई, वह इस तरह है—

एटीएम में रुपए डालने वाली कंपनी सीएमसी इंफो सिस्टम प्रा.लि. में राजूराम नायक नाम का कर्मचारी काम करता था. किन्हीं कारणों से कंपनी ने उसे हटा दिया था. लेकिन वह कंपनी के एक वाट्सएप ग्रुप से जुड़ा रहा. इसलिए उसे कंपनी की सारी सूचनाएं वाट्सएप पर मिलती रहती थीं. इस में यह सूचना भी होती थी कि वैन कहां जाएगी और उस में कितना पैसा तथा कौनकौन लोग होंगे.

राजूराम मकराना के मोरेड़ गांव का रहने वाला था. इसी गांव का कन्हैया लाल उस का दोस्त था. दोनों साथ बैठ कर शराब पीते थे. इन दोनों की दोस्ती मनोज पादरा से भी थी. वारदात से करीब दो-ढाई महीने पहले राजूराम, कन्हैया लाल और मनोज पादरा ने मिल कर कंपनी की कैश वैन लूटने की योजना बनाई. इन लोगों ने अपनी योजना में सेवाराम को भी शामिल कर लिया.

मोरेड़ गांव का रहने वाला सेवाराम बीकानेर में काम करता था. चारों ने मिल कर भले ही लूट की योजना बना ली थी. लेकिन वे बड़ी वारदात करने की हिम्मत नहीं जुटा पाए. इन के संबंध अलवर जिले के बानसूर के रहने वाले महिपाल उर्फ एमपी यादव से थे. महिपाल यादव कुख्यात अपराधी था. उस के खिलाफ विभिन्न थानों में नकबजनी, डकैती, चोरी, मारपीट आदि के कई मुकदमे दर्ज थे.

इन लोगों ने महिपाल यादव से फोन पर बात कर वारदात से करीब डेढ़ महीने पहले उसे मकराना बुलाया. महिपाल अपने कुछ साथियों के साथ पहुंच गया. उस के आने पर वैन लूटने की योजना को पुख्ता किया गया. लेकिन तय किए गए दिन वैन दूसरे रूट से चली गई. इस के बाद महिपाल और उस के साथी मकराना से वापस लौट गए.

राजूराम नायक ने महिपाल को 22 अप्रैल को मोरेड बुलाया. महिपाल अपने कुछ साथियों के साथ मेजर जीप ले कर मोरेड पहुंच गया. राजूराम नायक, मनोज पादरा, कन्हैयालाल और सेवाराम ने महिपाल और उस के साथियों के साथ बैठ कर उसी दिन कैश वैन लूटने की योजना को अंतिम रूप दिया. उस दिन सोमवार था, राजूराम को पता था कि सोमवार को वैन में ज्यादा कैश होता है.

लूट की योजना को अंतिम रूप दे कर राजूराम इन से अलग हो गया. उसे पता था कि अगर वह साथ रहा, तो वैन में कैश के साथ चलने वाले कर्मचारी उसे पहचान लेंगे. राजूराम ने कन्हैया को महिपाल के साथ उस की जीप में बैठा दिया. कन्हैया को स्थानीय रास्तों को पूरी जानकारी थी. जीप में कन्हैया के साथ महिपाल अपने साथियों के साथ ले कर बोरावड़ कस्बे के बाहर बिदियाद रोड पर सुनसान जगह पर खड़े हो गए.

मनोज पादरा और सेवाराम बाइक पर सवार हो कर बोरावड़ पहुंच कर कैश वैन की रेकी करने लगे. बोरावड़ में पीएनबी के एटीएम में रकम डालने के बाद कैश वैन जब परबतसर और बडू के लिए रवाना हुई. तो मनोज ने मोबाइल पर महिपाल को सूचना दे दी. इस के बाद मनोज व सेवाराम बाइक पर वैन के पीछे चलने लगे.

कैश वैन बोरावड़ से निकल कर छापर बस्ती के पास पहुंची तो पहले से अलर्ट खड़े महिपाल के गिरोह ने तेजी से जीप चला कर पीछे से कैश वैन में टक्कर मारी. इस से वैन एक दीवार से जा टकराई. वैन में सवार लोग जब तक कुछ समझते तब तक जीप ने वैन में दोबारा टक्कर मार दी.

इस के बाद जीप से उतरे महिपाल और उस के साथियों ने पिस्तौल दिखा कर वैन में सवार लोगों को धमकाया. महिपाल ने गार्ड प्रताप सिंह की बंदूक छीन ली. महिपाल के साथियों ने कैश वैन के कर्मचारियों के मोबाइल और उन के 2 बैग छीन लिए. फिर वैन में रखे नोटों से भरे बक्से की जंजीर तोड़ दी और उस बक्से को अपनी जीप में रख कर भाग गए.

जीप में सवार कन्हैया के बताए कच्चे रास्तों से हो कर महिपाल ने अपने साथियों की मदद से बक्से में भरे सारे नोट अलगअलग बैग में भरवाए. फिर वह खाली बक्सा सबलपुर रोड पर फेंक दिया. बाइक पर सवार मनोज पादरा व सेवाराम उन के साथ हो गए. मनोज पादरा जीप के आगे बाइक चलाते हुए महिपाल को सबलपुर, बिल्लू हुलढाणी, भावसिया, नाथ का बेरा, खानपुर, करकेड़ी व सलेमाबाद हो कर हरमाड़ा छोड़ कर चला गया.

हरमाड़ा से मनोज, सेवाराम व कन्हैया बाइक पर सवार हो कर अपने गांव मोरेड़ आ गए. महिपाल जीप से अपने साथियों के साथ नोटों से भरे बैग व गार्ड से छीनी बंदूक ले कर जयपुर होता हुआ बानसूर आ गया. बाद में सेवाराम व मनोज वगैरह सोशल मीडिया के जरिए महिपाल यादव को पुलिस की जांच पड़ताल की सूचनाएं देते रहे.

सीसीटीवी फुटेज के जरिए बाइक सवार मनोज पादरा का पता चलने के बाद पूरे गिरोह का पता चल गया. पुलिस ने लूट के इस मामले में 9 आरोपियों अलवर जिले के बानसूर निवासी महिपाल यादव, लोकेश कुमार, अगर मीणा व धर्मपाल यादव, मकराना के मोरेड़ गांव के रहने वाले राजूराम नायक, मनोज पादरा, कन्हैयालाल ब्राह्मण, सेवाराम जाट और माजरा रावत निवासी यादराम गुर्जर को गिरफ्तार कर लिया.

एसपी डा. सिंगला का कहना है कि कैश वैन लूट की इस वारदात का खुलासा करने में कांस्टेबल रामकुमार विश्नोई की अहम भूमिका रही. रामकुमार पहले मकराना थाने में तैनात था, अब कुचामन थाने में है. रामकुमार के प्रयासों से ही लूटेरों का सुराग मिला.

पुलिस ने गिरफ्तार आरोपियों को अदालत में पेश किया. अदालत ने लूट के मास्टर माइंड महिपाल यादव को 10 दिन और राजू नायक व मनोज को 5-5 दिन के रिमांड पर लिया. बाकी 6 आरोपियों को न्यायिक अभिरक्षा में जेल भेज दिया गया.

कथा लिखे जाने तक लूट की रकम में से करीब 30 लाख रुपए ही बरामद हुए थे. बाकी रकम किन लोगों के पास है, पुलिस पता लगाने की कोशिश कर रही थी. इस के अलावा वारदात में प्रयुक्त हथियारों की बरामदगी और महिपाल के फरार साथियों को पकड़ने की कोशिश भी चल रही थी. वहीं एटीएम में रकम डालने वाली कंपनी सीएमसी इंफोे सिस्टम प्रा.लि. ने बाद में बताया कि लूटी गई रकम लगभग 74 लाख नहीं बल्कि 81 लाख 71 हजार 800 रुपए थी. पुलिस लूटी गई सही रकम के बारे में जांच कर रही थी.

बहरहाल, लूट की इस वारदात में सब से बड़ी लापरवाही एटीएम में कैश डालने वाली कंपनी की रही. कंपनी ने अपने थोड़े से आर्थिक लाभ के लिए बख्तरबंद गाड़ी के स्थान पर निजी वैन को इस जोखिम भरे काम में लगा रखा था. 2 हथियारबंद गार्डों के बजाए एक ही गार्ड ही रखा था.

एक गलती यह भी रही कि जिस कर्मचारी को कंपनी ने नौकरी से निकाल दिया था, उसे कंपनी के वाट्सग्रुप से नहीं हटाया. इन्हीं सब खामियों का फायदा उठा कर बदमाशों ने इतनी बड़ी वारदात को अंजाम दे दिया.

गनीमत यह रही कि लूट की इस वारदात में किसी की जान नहीं गई. कैश वैन के कर्मचारियों ने भी कोई विरोध नहीं किया. वरना इतनी बड़ी रकम के लिए विरोध होने पर बदमाशों की ओर से किसी को गोली मार देना बड़ी बात नहीं थी.

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(कहानी सौजन्य- मनोहर कहानियां)

निखिल अग्रवाल

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